स्कूल, बच्चों को गड्ढे का पानी से बर्तन धोने को मजबूर

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बस्तर के मानलापाल में शिक्षा व्यवस्था की बदहाल हकीकत: सामुदायिक भवन में संचालित

स्कूल, बच्चों को गड्ढे का पानी से बर्तन धोने को मजबूर, बच्चों को गड्ढे का पानी से बर्तन धोने को मजबूर

मानलापाल (बस्तर), छत्तीसगढ़ – बस्तर जिले के ग्राम पंचायत मानलापाल के नया मुंडा पारा क्षेत्र में स्थित शासकीय प्राथमिक शाला की स्थिति बेहद चिंताजनक है। यहां स्कूली शिक्षा नाम मात्र की हो रही है, और मूलभूत सुविधाओं की घोर कमी है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इस स्कूल का संचालन किसी भवन या शैक्षणिक ढांचे में नहीं, बल्कि एक सामुदायिक भवन में किया जा रहा है।

स्थानीय शिक्षकों और ग्रामीणों की मानें तो यह स्कूल वर्ष 2022-23 से चालू हुआ है, लेकिन अब तक यहां न तो समुचित पानी की व्यवस्था है और न ही स्कूल भवन की मरम्मत या निर्माण कार्य पूर्ण हुआ है। स्कूल में नामांकित बच्चों की संख्या लगभग 35 है, लेकिन पीने के पानी और साफ-सफाई जैसी प्राथमिक सुविधाएं अब तक उपलब्ध नहीं कराई जा सकी हैं।

गड्ढे के पानी से बर्तन धोने को मजबूर मासूम बच्चे

एक तस्वीर जो हाल ही में सामने आई है, उसमें कुछ बच्चे मिड-डे मील (मध्याह्न भोजन) के बाद थालियाँ धोने के लिए स्कूल से दूर एक गड्ढे में पानी इस्तेमाल करते नजर आए। यह स्थिति बताती है कि बच्चों को साफ पानी के लिए या तो 3-400 मीटर दूर स्थित नल के पास जाना पड़ता है या फिर आसपास खुदे हुए गड्ढों का सहारा लेना पड़ता है।

न सचिव गंभीर, न सरपंच जागरूक

स्थानीय रसोइयों और शिक्षकों का कहना है कि कई बार सरपंच से पानी की समस्या को लेकर निवेदन किया गया, लेकिन कोई ठोस पहल नहीं हुई। सचिव से संपर्क की बात पर कहा गया कि उन्होंने अब तक प्रयास नहीं किया है। पंचायत के पास विकास योजनाओं के नाम पर लाखों रुपये स्वीकृत होते हैं, लेकिन प्राथमिक स्कूल की यह हालत विकास की पोल खोलती है।

पानी की व्यवस्था तो दूर, स्कूल भवन भी अधूरा

पुराना स्कूल भवन जर्जर होने के कारण तोड़ा जा चुका है, लेकिन नया भवन अब तक नहीं बन पाया है। बच्चों को अस्थायी सामुदायिक भवन में पढ़ाया जा रहा है, जो मूलतः स्कूल के लिए नहीं बना था। बारिश के मौसम में स्थिति और बदतर हो जाती है। साफ पानी की कोई व्यवस्था नहीं होने से स्वास्थ्य पर भी गंभीर खतरा बना हुआ है।

प्रशासन और पंचायत की लापरवाही उजागर

यह पूरी स्थिति प्रशासन और पंचायत की लापरवाही का जीता-जागता उदाहरण है। सवाल उठता है कि जब पंचायत द्वारा लाखों रुपये पानी की सुविधा और स्कूल निर्माण के लिए आवंटित किए जाते हैं, तो आखिर वह पैसा कहां जा रहा है?

अब ज़रूरत है सख्त कार्रवाई और जवाबदेही की। ऐसे हालात में बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों खतरे में हैं। यदि इस दिशा में जल्द ही कदम नहीं उठाया गया, तो यह न सिर्फ एक स्कूल की विफलता होगी, बल्कि एक पूरे तंत्र की नाकामी का प्रतीक बन जाएगा।

लेखक की टिप्पणी: अगर आप इस स्थिति से संबंधित हैं या आपके पास और तथ्य हैं, तो कृपया स्थानीय प्रशासन, मीडिया या जनप्रतिनिधियों तक यह मुद्दा पहुँचाएँ। यह हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है कि शिक्षा का अधिकार सिर्फ कागज़ों तक सीमित न रहे, बल्कि बच्चों को उसका असल लाभ मिल सके।

 

 

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