छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल के ऊपर ईडी ने कार्रवाई की 

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की ईडी कार्रवाई पर सियासी भूचाल: ‘बर्थडे गिफ्ट’ या ‘बदले की कार्रवाई’?

छत्तीसगढ़ की राजनीति एक बार फिर उस मोड़ पर खड़ी है जहां सत्ता, विपक्ष और जांच एजेंसियों के बीच टकराव साफ दिखाई दे रहा है। इस बार मामला है पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल पर ईडी की छापेमारी और गिरफ्तारी का, और वो भी उनके जन्मदिन के दिन।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया पर इस पूरे घटनाक्रम को “जन्मदिन का तोहफा” बताते हुए तंज कसा। उन्होंने कहा कि पहले उनके जन्मदिन पर, फिर अब उनके बेटे के जन्मदिन पर ईडी भेजी गई। यह संयोग नहीं, बल्कि एक सुनियोजित राजनीतिक प्रतिशोध है।

छत्तीसगढ़

क्या है पूरा मामला?

चैतन्य बघेल का नाम राज्य में हुए शराब घोटाले से जुड़ते हुए सामने आया था। इसी को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 19 जुलाई की सुबह रायपुर स्थित उनके आवास पर छापेमारी की और उन्हें हिरासत में लिया। खबर है कि ईडी ने उन्हें पांच दिन की रिमांड पर लिया है।

लेकिन इस कार्रवाई ने प्रदेश में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच भारी आक्रोश पैदा कर दिया। रायपुर से लेकर भिलाई तक विरोध प्रदर्शन हुए। युवा कांग्रेस, महिला कांग्रेस और पार्टी के अन्य संगठनों ने जगह-जगह ईडी और मुख्यमंत्री विश्वेश्वर राय का पुतला दहन किया।

मौजूद एक कार्यकर्ता ने कहा,

क्या कहती है कांग्रेस?

पुतला दहन कार्यक्रम में मौजूद एक कार्यकर्ता ने कहा,

> “भाजपा सरकार बदले की राजनीति कर रही है। भूपेश भैया के जन्मदिन पर ईडी पहुंची, अब चैतन्य भैया के जन्मदिन पर। क्या ईडी के पास बर्थडे कैलेंडर है?”

एक अन्य महिला कांग्रेस पदाधिकारी ने तीखे शब्दों में कहा,

> “हमने प्रधानमंत्री चुना है या खतरों का खिलाड़ी? जो भी जनता की आवाज उठाता है, उसके घर ईडी और सीबीआई भेज दी जाती है। ये सरकार गरीबों की नहीं, अडानी-अंबानी की है।”

विधानसभा का बहिष्कार और आगे की रणनीति

ईडी की कार्रवाई के विरोध में कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा सत्र का बहिष्कार किया और रायपुर स्थित ईडी कार्यालय के बाहर धरना दिया। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि यह “तानाशाही रवैया” जारी रहा, तो वे मुख्यमंत्री निवास और विधानसभा का घेराव करेंगे।

युवा कांग्रेस ने साफ कहा है कि वे सड़कों पर उतरने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

> “जनहित की आवाज को अगर दबाने की कोशिश की गई, तो यह आंदोलन पूरे प्रदेश में फैल जाएगा।”

सत्तापक्ष की प्रतिक्रिया?

भाजपा की ओर से अभी तक इस विषय पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन अंदरखाने से खबर है कि ईडी की कार्रवाई को “कानून के तहत की गई आवश्यक प्रक्रिया” बताया गया है।

जनता का सवाल

अब सवाल उठता है कि क्या ईडी की यह कार्रवाई सच्चाई की खोज है या फिर राजनीतिक बदले की भावना? क्या विपक्ष की आवाज को दबाने के लिए जांच एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है?

आपका इस विषय पर क्या कहना है?

कमेंट सेक्शन में अपनी राय ज़रूर दें।

यह खबर आपके लिए कितनी महत्वपूर्ण है, इसे शेयर करें और जनचर्चा को ज़िंदा रखें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *