IEX शेयरों में 28% की भारी गिरावट, CERC के मार्केट कपलिंग फैसले का बड़ा असर
इंडियन एनर्जी एक्सचेंज (IEX) के शेयरों में गुरुवार को बड़ी गिरावट देखने को मिली। कंपनी के स्टॉक्स 28% टूटकर ₹135.26 के निचले स्तर तक जा पहुंचे। यह गिरावट केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (CERC) द्वारा बिजली व्यापार में चरणबद्ध तरीके से मार्केट कपलिंग लागू करने की घोषणा के बाद दर्ज की गई।
क्या है मार्केट कपलिंग और क्यों लिया गया फैसला?
मार्केट कपलिंग एक आर्थिक मॉडल है, जो विभिन्न बिजली एक्सचेंजों के बीच एक समान मूल्य निर्धारण की व्यवस्था करता है। इसका मुख्य उद्देश्य बिजली बाजार की प्रणाली दक्षता और पारदर्शिता में सुधार करना है। CERC के अनुसार, जनवरी 2026 से डे-अहेड मार्केट (DAM) को राउंड-रॉबिन मार्केट कपलिंग मॉडल के अंतर्गत लाया जाएगा।
इसके तहत देश के सभी पावर एक्सचेंजों को एक साझा प्लेटफॉर्म के जरिए बिजली की कीमत तय करने की प्रक्रिया में जोड़ा जाएगा। यानी अब IEX जैसी किसी एक संस्था का मूल्य निर्धारण पर नियंत्रण नहीं रहेगा।
IEX पर प्रभाव: बाजार प्रभुत्व को खतरा
IEX वर्तमान में भारत का सबसे बड़ा और प्रमुख बिजली ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म है, जो हाजिर बाजार में मूल्य निर्धारण में अग्रणी भूमिका निभाता रहा है। लेकिन मार्केट कपलिंग लागू होने से इसका वर्चस्व कमजोर हो सकता है, जिससे इसकी बाजार हिस्सेदारी और राजस्व पर नकारात्मक असर पड़ने की संभावना है।
नई व्यवस्था के तहत, सभी एक्सचेंज बारी-बारी से मार्केट कपलिंग ऑपरेटर की भूमिका निभाएंगे, जबकि ग्रिड इंडिया बैकअप और ऑडिट की भूमिका में होगा।
CERC का विज़न: एकीकृत और पारदर्शी बिजली बाजार
CERC ने कहा है कि यह कदम भारत को 2030 तक 500 GW नवीकरणीय ऊर्जा के लक्ष्य की ओर ले जाने के लिए जरूरी है। वर्तमान में देश में बिजली का हाजिर बाजार सिर्फ 7% की तरलता के साथ बंटा हुआ है, जिसमें मूल्य निर्धारण की पारदर्शिता की कमी है।
मार्केट कपलिंग न सिर्फ बाजार को तरल और प्रतिस्पर्धात्मक बनाएगा, बल्कि आपूर्ति और मांग के बीच संतुलन भी बेहतर करेगा। इससे बिजली उपभोक्ताओं को दीर्घकालिक लाभ मिल सकते हैं।
आगे की योजना और क्रियान्वयन प्रक्रिया
जनवरी 2026 से डे-अहेड मार्केट (DAM) में मार्केट कपलिंग लागू होगा।
टर्म-अहेड मार्केट (TAM) और रियल-टाइम मार्केट (RTM) को बाद में एकीकृत किया जाएगा।
सभी एक्सचेंजों को ग्रिड-इंडिया और CERC के साथ डेटा साझा करने का निर्देश दिया गया है।
कार्यान्वयन की प्रगति के आधार पर नए दिशा-निर्देश भी जारी होंगे।
IEX की भूमिका और भविष्य की रणनीति
IEX ने भारत के साथ-साथ सीमा पार बिजली व्यापार में भी कदम बढ़ाया है, जिससे यह क्षेत्रीय ऊर्जा सहयोग में अहम भूमिका निभा रहा है। इसके प्लेटफॉर्म पर देशभर के 8,100 से अधिक उपभोक्ता और विक्रेता जुड़े हैं।
हालांकि, मौजूदा निर्णय कंपनी के लिए एक रणनीतिक चुनौती के रूप में सामने आया है, जिससे निपटने के लिए IEX को अपने कारोबारी मॉडल में लचीलापन और नवाचार लाना होगा।
निष्कर्ष:
CERC का यह निर्णय भारत के बिजली बाजार को अधिक संगठित, तरल और प्रतिस्पर्धात्मक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। वहीं, IEX जैसी कंपनियों के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण बदलाव है, जिसमें बाजार हिस्सेदारी बचाए रखने के लिए नवाचार और अनुकूलन अनिवार्य हो गया है।