छत्तीसगढ़ के जवानों के घर फिर बने चोरों का निशाना: आठवीं बटालियन परिसर में एक बार फिर बड़ी चोरी, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के पिंडी गांव स्थित छत्तीसगढ़ आर्म्ड फोर्स (CAF) की आठवीं बटालियन एक बार फिर चोरों के निशाने पर आ गई है। बीती रात हुई चोरी ने न केवल जवानों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि पूरे तंत्र की संवेदनहीनता को भी उजागर कर दिया है।
जानकारी के मुताबिक, रविवार-सोमवार की दरमियानी रात करीब 3:00 से 4:00 बजे के बीच अज्ञात चोरों ने परिसर में स्थित छह मकानों के ताले तोड़े, जिनमें से दो घरों से सोने-चांदी के जेवरात और लगभग ₹20,000 से ₹25,000 की नकदी चोरी हो गई। बाक़ी चार मकानों में दो में कोई मौजूद नहीं था और अन्य दो में चोरों को कुछ हाथ नहीं लगा।
दो साल पहले भी हुई थी बड़ी चोरी, अब तक नहीं मिले चोर
बता दें कि वर्ष 2022 में भी इसी बटालियन में ₹30 लाख से अधिक के जेवरात और नगदी की चोरी हुई थी, लेकिन उस मामले में आज तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। अब दो साल बाद एक बार फिर चोरी की घटना सामने आने से लोगों में आक्रोश है और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
जवान देश की रखवाली करें या अपने घर की?
जिस बटालियन में देश की सुरक्षा में तैनात जवान रहते हैं, उसी बटालियन में दोबारा चोरी होना चिंताजनक है। सुरक्षा के नाम पर जहां चारों ओर ऊंची बाउंड्री वॉल और 12 फीट की फेंसिंग है, वहीं मुख्य गेट पर 24 घंटे जवानों की तैनाती रहती है। ऐसे में चोरों का परिसर में प्रवेश करना और वारदात को अंजाम देना सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल रहा है।
पेट्रोलिंग में तैनात जवानों पर गिरी गाज
मामले की गंभीरता को देखते हुए रात की पेट्रोलिंग ड्यूटी में तैनात जवानों को निलंबित कर दिया गया है। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज भी जब्त किए हैं, जिनमें एक संदिग्ध व्यक्ति चोरी के बाद बाहर निकलता दिखाई दे रहा है। हालांकि फुटेज में चेहरा स्पष्ट नहीं है।
क्या अंदरूनी साजिश?
स्थानीय लोगों और बटालियन में रह रहे परिवारों का आरोप है कि चोरी की यह घटना किसी बाहरी की नहीं, बल्कि बटालियन परिसर के अंदर के किसी व्यक्ति की ही करतूत हो सकती है। परिसर में 400 से अधिक परिवार रहते हैं और कोई बाहरी व्यक्ति इतनी सुरक्षा के बीच आसानी से घुस नहीं सकता।
परिवारों में भय और असुरक्षा
जिस समय यह चोरी हुई, उस वक्त परिवार गहरी नींद में थे। चोरों ने पहले मुख्य दरवाज़े के ताले कटर से काटे, फिर अलमारी तक पहुंच कर जेवरात और नकदी पार कर दी। कुछ घरों में चोरों ने गुल्लक तक तोड़ दिए और उसमें रखे पैसे भी ले गए।
अब सवाल ये है:
क्या दोबारा चोरों तक पहुँच पाएगी पुलिस?
क्या जवानों के परिवार अपने ही आवास में सुरक्षित नहीं हैं?
और आखिर कब तक सुरक्षा में इतनी लापरवाही होती रहेगी?
छत्तीसगढ़ आर्म्ड फोर्स की प्रतिष्ठा और परिवारों की सुरक्षा से जुड़ा यह मामला अब राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन दोनों की तत्काल और पारदर्शी कार्रवाई की मांग करता है। जवान देश के लिए खड़े हैं, लेकिन उनके अपने घर कब महफूज़ होंगे, यह बड़ा सवाल बन चुका है।