स्वामी आत्मानंद स्कूलों की जर्जर हालत

स्वामी आत्मानंद

स्वामी आत्मानंद स्कूलों की जर्जर हालत पर यूथ कांग्रेस का प्रदर्शन, D.E.O. ऑफिस के सामने सैकड़ों युवा पहुंचे।

स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालयों की बदहाल स्थिति को लेकर आज जिले की युवा कांग्रेस इकाई ने ज़िला शिक्षा अधिकारी (D.E.O.) कार्यालय के सामने ज़बरदस्त प्रदर्शन किया। बारिश के कारण कई स्कूलों में पानी भरने, टूटी छतें, गिरती बाउंड्री वॉल और टूटी बेंच जैसी समस्याओं को लेकर युवाओं ने नाराजगी जाहिर की।

(D.E.O.)

500 से अधिक युवा जुटे

इस विरोध प्रदर्शन में करीब 500 युवा मौजूद रहे, जिनमें भिलाई, रिसाली, खुर्सीपार, सेक्टर 6, छावनी और बालाजी नगर से बड़ी संख्या में छात्र-युवा शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि लगातार हो रही बारिश के कारण स्कूलों में जलजमाव की स्थिति बन गई है, जिससे बच्चों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है।

“अगर काम नहीं कर सकते तो कुर्सी छोड़ें”

प्रदर्शन में शामिल एक युवा कांग्रेस नेता ने कहा,

> “स्कूलों की हालत बेहद खराब है। बाउंड्री वॉल गिर चुकी है, छत से पानी टपक रहा है, फर्नीचर टूटा हुआ है। लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी चुपचाप बैठे हैं। अगर वो जिम्मेदारी नहीं निभा सकते, तो उन्हें पद छोड़ देना चाहिए।”

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित अधिकारियों द्वारा बार-बार दिए जा रहे निर्देशों को स्कूल प्रशासन गंभीरता से नहीं ले रहा, और हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं।

दुर्घटना की आशंका, अभी तक शिकायत नहीं

हालांकि अभी तक किसी बच्चे के घायल होने की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ऐसी परिस्थिति में कोई भी बड़ा हादसा हो सकता है। इसीलिए वे पहले से चेतावनी और मांगें लेकर आए हैं ताकि भविष्य में किसी परिवार को नुकसान न उठाना पड़े।

कांग्रेस सरकार

कांग्रेस सरकार की योजना पर सवाल नहीं, क्रियान्वयन पर नाराज़गी

स्वामी आत्मानंद स्कूल योजना को कांग्रेस सरकार की एक शानदार पहल बताया गया, लेकिन युवाओं का कहना है कि उसके क्रियान्वयन और रखरखाव पर अब ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

> “योजना तो गरीब और मध्यमवर्गीय बच्चों के लिए बहुत बढ़िया थी, लेकिन वर्तमान हालात में निरीक्षण की कोई व्यवस्था नहीं है।”

खेलों में भी भेदभाव का आरोप

एक खिलाड़ी-कार्यकर्ता ने आरोप लगाया कि खेलों के क्षेत्र में भी भेदभाव किया जा रहा है।

> “पहले सभी स्कूलों को साथ में खेल प्रतियोगिताओं में शामिल किया जाता था, लेकिन अब सरकारी और निजी स्कूलों को अलग-अलग कर दिया गया है। खेल भाईचारे का प्रतीक होता है, उसमें वर्गीकरण नहीं होना चाहिए।”

ज्ञापन सौंपा गया, कार्रवाई का भरोसा मिला

युवा कांग्रेस ने जिला शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंपा जिसमें सभी विद्यालयों की मूलभूत समस्याएं – जैसे कि अतिरिक्त शिक्षकों की नियुक्ति, खेल सुविधाओं में सुधार, फर्नीचर और भवनों की मरम्मत की मांगें रखी गई हैं। अधिकारी ने आश्वासन दिया कि “तत्काल जो संभव होगा वह किया जाएगा और शेष मांगों पर प्रस्ताव तैयार कर राज्य सरकार को भेजा जाएगा।”

15 दिनों की डेडलाइन, फिर बड़ा आंदोलन

प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि 15 से 20 दिनों में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो आंदोलन को जिला कलेक्टर कार्यालय तक ले जाया जाएगा और ज़्यादा आक्रामक रूप में विरोध दर्ज कराया जाएगा।

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