Gold price Today (10 ग्राम आधार पर)

Gold, डॉलर में उतार-चढ़ाव: अमेरिकी डॉलर में गिरावट के चलते निवेशक सुरक्षित विकल्प के रूप में सोने को चुन रहे हैं। फेडरल रिजर्व की नीति: ब्याज दरों में स्थिरता ने सोने की मांग को बल दिया है। भू-राजनीतिक तनाव: रूस-यूक्रेन और पश्चिम एशिया में जारी तनाव से निवेशक अस्थिरता से बचने के लिए सोने की ओर रुख कर रहे हैं। 📊 भारत में मांग का असर भारत में त्योहारी सीज़न की आहट और शादी-ब्याह का मौसम आने से भी सोने की घरेलू मांग में तेजी देखी जा रही है। इससे कीमतों को और सहारा मिल रहा है। रिटेल मार्केट में खासकर 22 कैरेट गोल्ड की मांग बढ़ी है, जो आमतौर पर आभूषणों में इस्तेमाल होता है।

📉 आज के Gold के भाव(10 ग्राम आधार पर)

जुलाई 2025 की शुरुआत होते ही Gold के रेट में फिर से मजबूती देखने को मिली है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता और घरेलू स्तर पर मांग बढ़ने के चलते सोने की कीमतें एक बार फिर निवेशकों के फोकस में हैं। आज भारत में 24 कैरेट सोना औसतन ₹98,330प्रति 10 ग्राम के आसपास बिक रहा है, जबकि कुछ शहरों में यह ₹98,993तक पहुंच गया है।

24 कैरेट सोना: ₹98,993 प्रति 10 ग्राम—यह गिरावट ₹10 प्रति 10 ग्राम रही

22 कैरेट सोना: ₹90,763 प्रति 10 ग्राम—₹10 प्रति 10 ग्राम की गिरावट

24 कैरेट (Moneycontrol के अनुसार): लगभग ₹98,200 से ₹98,820 प्रति 10 ग्राम का औसत

 

चांदी: ₹1,09,900–1,10,000 प्रति किलो—मुख्य रूप से ₹1,09,900

शहरवार रेट्स भी आज गिरावट के संकेत दे रहे हैं, जैसे बैंगलोर, चेन्नई, हैदराबाद, पुणे, मुंबई आदि में 24 कैरेट सोना ₹98,835–₹98,853 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा है ।

क्यों हुआ यह गिरावट?

🔹 अंतरराष्ट्रीय कारक

अमेरिकी डॉलर में मजबूती जारी है, जिसने Gold की वैश्विक कीमतों को धीमा रखा—डॉलर-रुपया में उतार-चढ़ाव का प्रभाव देखना हुआ

निवेशक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति और जुलाई में संभावित वार्ता के प्रति सावधान हैं, जिसने सोने की मांग में नरमी लाई ।

🔹 घरेलू कारक

शुक्रवार को सप्ताहांत के बाद ट्रेडिंग शुरू हुई और बाजार में हल्की गिरावट बनी रही, स्थानीय सर्राफा बाजार में 24 कैरेट सोने के भाव में 550–₹500 की गिरावट दर्ज हुई ।

मौजूदा समय में भी सावन का मिश्रित प्रभाव देखने को मिला—पूजा-पाठ की खरीदारी धीमी और निवेशक अलर्ट मोड में रहे ।

निवेशकों के लिए मायने

1. मौका: गिरावट का यह छोटा वॉर्म-डाउन खरीदारी का अच्छा समय दे सकता हैं, विशेषकर डिजिटल गोल्ड, ज्वैलरी या गोल्ड ईटीएफ में।

2. ध्यान देने योग्य: अगर डॉलर में कमजोरी आती है या फेड की पॉलिसी को शिथिलता मिलती है, तो सोना फिर से तेज हो सकता है।

3. लाभ-हानि: गिरावट ₹10 से ₹550 तक है—निवेशकों को निर्णय लेने में व्यवहारिकता लाने का संकेत देती है।

 

सोने की कीमतों में इस वृद्धि के पीछे कुछ वैश्विक फैक्टर हैं:

डॉलर में उतार-चढ़ाव: अमेरिकी डॉलर में गिरावट के चलते निवेशक सुरक्षित विकल्प के रूप में सोने को चुन रहे हैं।

फेडरल रिजर्व की नीति: ब्याज दरों में स्थिरता ने सोने की मांग को बल दिया है।

भू-राजनीतिक तनाव: रूस-यूक्रेन और पश्चिम एशिया में जारी तनाव से निवेशक अस्थिरता से बचने के लिए सोने की ओर रुख कर रहे हैं।

 

📊 भारत में मांग का असर

भारत में त्योहारी सीज़न की आहट और शादी-ब्याह का मौसम आने से भी सोने की घरेलू मांग में तेजी देखी जा रही है। इससे कीमतों को और सहारा मिल रहा है। रिटेल मार्केट में खासकर 22 कैरेट गोल्ड की मांग बढ़ी है, जो आमतौर पर आभूषणों में इस्तेमाल होता है।

आगे क्या संभावनाएँ?

फेडरल रिजर्व की बैठक (9 जुलाई): अगर ब्याज दरों में कटौती की आशंका बनी रहती है, तो सोने में एक स्पाइक देखने को मिल सकता है ।

टैरिफ वार्ता: अमेरिकी-चीन व्यापार वार्ता, तकनीकी तथा भू-राजनीतिक तनाव, सोने(Gold) की डिस्पोजिशन पर असर डाल सकते हैं ।

स्थानीय मांग: सावन, त्योहार और शादियों के सीजन आगे बढ़ेगा तो सामान्यतः मांग बढ़ने की उम्मीद रहती है।

 

खरीदने से पहले ध्यान दें

कर एवं मेकिंग चार्ज: सोने पर 3% GST, मेकिंग चार्ज पर अतिरिक्त 5%, आयात शुल्क 10% और 0.5% AIDC लगता है ।

शुद्धता पर निर्णय: निवेशकों को 24 कैरेट (99.9% शुद्ध) और 22 कैरेट (ज्वैलरी हेतु उपयुक्त) में बेहतर समझ बनानी चाहिए ।

निवेश विकल्प: फिजिकल गोल्ड की तुलना में गोल्ड ईटीएफ और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड टैक्स तथा ट्रैकिंग के दृष्टिकोण से बेहतर हो सकते हैं ।

 

निष्कर्ष

07 जुलाई 2025 को सोने (Gold)के भाव में गिरावट ₹10–₹550 तक दर्ज की गई। यह निवेशकों को एक अवसर उपलब्ध कराता है, बशर्ते वे अपने निवेश उद्देश्य (जानकारी, अलंकरण या सुरक्षित निवेश) के तहत सही विकल्प चुनें। फेड की नीति और ग्लोबल आर्थिक संकेतों पर नजर रखकर आगे का रुख तय करना उपयोगी रहेगा।

यह लेख न केवल आज के भावों का विवरण देता है, बल्कि मौजूदा बाज़ार परिदृश्य,

खरीदारी टाइमिंग और वैकल्पिक निवेश विकल्पों की समझ भी प्रदान करता है।

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