सुशासन के दावों के बीच जमीनी सच्चाई: जशपुर में मितानीन ने प्रसूता को पीठ पर लादकर पार किया उफनता नाला,
मितानीन बिस्मनी बाई ने गर्भवती महिला को अपनी पीठ पर बांधकर उफनते नाले को पार किया ।छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार ने हाल ही में “सुशासन तिहार” मनाते हुए यह दावा किया था कि राज्य के 44 लाख से अधिक लोगों की समस्याओं का त्वरित समाधान किया गया है। लेकिन मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के गृह जिले जशपुर से सामने आई एक घटना ने इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जिले के मनोरा ब्लॉक स्थित सतालु टोला गांव में 2 जुलाई की रात एक गर्भवती महिला, संगीता बाई, को प्रसव पीड़ा शुरू हुई। भारी बारिश के कारण गांव की पुलिया पहले ही बह चुकी थी और रास्ता पूरी तरह अवरुद्ध हो गया था। एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी। ऐसे में मितानीन बिस्मनी बाई ने संगीता बाई को अपनी पीठ पर बांधकर 1.5 किलोमीटर पैदल चलकर सोनक्यारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाया। एक अन्य महिला ने नवजात को संभाला और तीसरी महिला साथ में चली। इस घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है।
सरकार के दावे और जमीनी हकीकत में फर्क
सरकार की तरफ से बार-बार यह दावा किया गया है कि प्रदेश में 99% स्थानों तक एंबुलेंस पहुंचने में कोई बाधा नहीं है, यहां तक कि बारिश के मौसम में भी नहीं। मुख्यमंत्री के हालिया बयानों में “हर मोहल्ले-मोहल्ले तक सड़क”, “विजन मन योजना के तहत 50% काम छत्तीसगढ़ में पूर्ण” जैसे वाक्य लगातार दोहराए जा रहे हैं।
परंतु सतालु टोला की इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी दावे और ग्रामीण सच्चाई के बीच एक लंबी खाई है। संगीता बाई की जान बचाने वाली मितानीन बिस्मनी बाई की सराहना करते हुए ग्रामीणों ने कहा कि अगर वह समय पर नहीं पहुंचती, तो शायद मां और नवजात दोनों की जान को खतरा हो सकता था।
ये कोई पहली घटना नहीं
मनेन्द्रगढ़ (स्वास्थ्य मंत्री का गृह जिला): मरीज को खाट पर लिटाकर ले जाना पड़ा था।
सरगुजा, लखनपुर क्षेत्र: 7 किमी पैदल चलकर गर्भवती महिला को कावड़ में ढोया गया।
दंतेवाड़ा, गीदम: मरीज की मौत 11 घंटे देरी से पहुंची एंबुलेंस के कारण हुई। परिजनों को शव के लिए भी 9 बार कॉल करना पड़ा।
कोंडागांव, बस्तर, नारायणपुर: ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी पीएचसी बंद, डॉक्टर की कमी, दवाइयों की भारी कमी।
सड़कें नहीं, पुल नहीं, अस्पताल नहीं
राज्य बनने के 25 साल बाद भी छत्तीसगढ़ के हजारों गांव आज भी सड़क, पुल-पुलिया और बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित हैं। बरसात के मौसम में तो स्थिति और भी भयावह हो जाती है। कई क्षेत्रों में ग्रामीणों को आज भी बीमारी या प्रसव की स्थिति में 10–40 किलोमीटर दूर अस्पताल ले जाना पड़ता है।
क्या वाकई “सुशासन तिहार है ?
ऐसे में सवाल उठता है कि जब राजधानी रायपुर और बड़े शहरों में बैठकर “सुशासन तिहार” मनाया जाता है, तो क्या राज्य की उन लाखों महिलाओं और ग्रामीणों की कोई सुध ली जाती है, जो रोज़ मरते-जीते ऐसे हालात से गुजरते हैं?
छत्तीसगढ़ के जशपुर में मितानीन ने एंबुलेंस नहीं मिलने पर गर्भवती महिला को पीठ पर लादकर 1.5 किमी तक पैदल चलकर अस्पताल पहुंचाया। यह घटना सरकार के सुशासन तिहार और विकास के दावों की पोल खोलती है।
जशपुर में बारिश के कारण पुलिया बह गई, एंबुलेंस नहीं पहुंची। मितानीन बिस्मनी बाई ने गर्भवती महिला को अपनी पीठ पर बांधकर उफनते नाले को पार किया और 1.5 किमी पैदल चलकर स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। यह घटना सरकार के सुशासन तिहार को कटघरे में खड़ा करती है।
सरकार को यह समझना होगा कि विज्ञापन नहीं, व्यवस्था की ज़रूरत है। बिस्मनी बाई जैसी जमीनी योद्धाओं की तारीफ की जानी चाहिए, लेकिन साथ ही यह भी ज़रूरी है कि ऐसे हालात दोबारा ना बनें।