साइबर ठगी – देशभर में हड़कंप

[डिजिटल अरेस्ट: एक कॉल, और करोड़ों की साइबर ठगी – देशभर में हड़कंप]

 

देश में साइबर क्राइम अब 5G से भी तेज रफ्तार से बढ़ रहा है। पहले जेबें कटती थीं, अब सीधे बैंक अकाउंट खाली हो जाते हैं — वो भी सिर्फ एक वीडियो कॉल से।

साइबर अपराध का एक नया और खतरनाक रूप “डिजिटल अरेस्ट” अब पूरे देश को अपनी चपेट में ले रहा है। इस घोटाले में शातिर ठग खुद को पुलिस, सीबीआई, इनकम टैक्स या कस्टम अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं, फर्जी आरोप लगाते हैं और फिर लाखों-करोड़ों की ठगी करते हैं।

पश्चिम बंगाल: 70 वर्षीय बुज़ुर्ग से ₹1 करोड़ की ठगी

पश्चिम बंगाल के नादिया जिले के राणाघाट में एक 70 वर्षीय बुजुर्ग के साथ डिजिटल अरेस्ट की वारदात हुई। एक व्हाट्सएप कॉलर ने खुद को मुंबई पुलिस का अधिकारी बताया और बुजुर्ग को अवैध गतिविधियों में फंसाने की धमकी दी। 7 दिनों तक पीड़ित को डिजिटल कैद में रखकर ₹1 करोड़ ठग लिए गए। इस मामले में पश्चिम बंगाल CID की साइबर सेल ने 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया — जिनमें से नौ को दोषी ठहराया गया है।

साइबर

छत्तीसगढ़: महिला से ₹2 करोड़ और रिटायर्ड अफसर से ₹2.83 करोड़ की ठगी

राजधानी रायपुर में हाल ही में एक महिला को वीडियो कॉल के जरिए डिजिटल अरेस्ट कर ₹2 करोड़ की ठगी की गई। खुद को दिल्ली पुलिस का अधिकारी बताकर एक फर्जी अफसर ने महिला को मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने की धमकी दी और धीरे-धीरे सारी रकम ठग ली।

 

एक अन्य चौंकाने वाला मामला रायपुर में ही सामने आया, जहां एक रिटायर्ड महिला जनरल मैनेजर से डेढ़ महीने तक वीडियो कॉल पर निगरानी रखकर ₹2.83 करोड़ की ठगी की गई। ठगों ने महिला को भरोसे में लेकर RTGS के जरिए रकम ट्रांसफर करवाई।

भिलाई: परिवार को महीनेभर डिजिटल अरेस्ट में रखकर ₹55 लाख की ठगी

भिलाई में भी इसी तरह का मामला सामने आया जहां एक महिला और उसके परिवार को मनी लॉन्ड्रिंग के फर्जी केस में फंसाने का डर दिखाकर 29 अप्रैल से 29 मई तक वीडियो कॉल पर रखा गया और ₹55 लाख की ठगी की गई। पुलिस ने लखनऊ से चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

दिल्ली-NCR: 3 महीने में 600 मामले, ₹400 करोड़ की ठगी

दिल्ली एनसीआर में सिर्फ 3 महीनों में डिजिटल अरेस्ट के 600 मामले दर्ज हुए हैं जिनमें ₹400 करोड़ से अधिक की साइबर ठगी हुई। इतना ही नहीं, 2024 में पूरे देश में डिजिटल अरेस्ट के ज़रिए ₹2,140 करोड़ से अधिक की ठगी दर्ज की गई

डिजिटल अरेस्ट कैसे काम करता है?

डिजिटल अरेस्ट कैसे काम करता है?

 

1. WhatsApp या Skype कॉल: कॉल पर व्यक्ति खुद को पुलिस या सरकारी अधिकारी बताता है।

2. डराने की रणनीति: कहा जाता है कि आधार, पैन या बैंक अकाउंट अवैध गतिविधियों में इस्तेमाल हुआ है।

3. वीडियो कॉल पर दबाव: थाने जैसी सेटिंग और फर्जी वर्दी दिखाकर डराया जाता है।

4. डिजिटल कैद: घंटों या दिनों तक वीडियो कॉल पर रखा जाता है, जिससे पीड़ित मानसिक रूप से कैद महसूस करता है।

5. राशि की मांग: जमानत, जांच या क्लीन चिट के नाम पर पैसे ट्रांसफर करवाए जाते हैं।

 

सरकारी आंकड़े क्या कहते हैं?

 

2024 में साइबर ठगी का कुल नुकसान: ₹22,811.95 करोड़

डिजिटल अरेस्ट से ठगी: ₹2,140 करोड़

2025 (जनवरी–मई) में साइबर ठगी: ₹7,000 करोड़

औसत प्रतिदिन ठगी: ₹40 करोड़

 

कैसे बचें डिजिटल अरेस्ट से?

 

कभी भी अजनबी कॉल पर विश्वास न करें।

सरकारी अधिकारी कभी WhatsApp/Skype पर संपर्क नहीं करते।

बैंक या व्यक्तिगत जानकारी किसी के साथ साझा न करें।

तुरंत 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।

कॉल के स्क्रीनशॉट, वीडियो, और लेन-देन की जानकारी सुरक्षित रखें।

 

निष्कर्ष:

डिजिटल अरेस्ट एक नया खतरा बन चुका है जो डर और भ्रम की मनोवैज्ञानिक रणनीति पर आधारित है। एक झूठा कॉल, एक फर्जी आरोप, और पल भर में आपकी सालों की कमाई गायब हो सकती है। इससे बचने का सबसे बड़ा हथियार है — जागरूकता।

> अगर सतर्क रहेंगे, तो सुरक्षित रहेंगे।

 

 

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