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शराब घोटाले में ईडी के पास ₹1000 करोड़ की लेनदेन के सबूत,

Breaking News | शराब घोटाले में चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी: ईडी के पास ₹1000 करोड़ की लेनदेन के सबूत, करीबी पप्पू बंसल बने सरकारी गवाह

शराब घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को गिरफ्तार कर लिया है। पीएमएलए कोर्ट ने ईडी को चैतन्य की 5 दिन की रिमांड दी है, जिसमें से एक दिन की पूछताछ पहले ही पूरी हो चुकी है। अगले चार दिन एजेंसी उनसे लगातार पूछताछ करेगी।

ईडी सूत्रों के अनुसार, चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी पुख्ता इनपुट और ठोस सबूतों के आधार पर की गई है। जानकारी के अनुसार, दुर्ग के कारोबारी और भूपेश बघेल के बेहद करीबी माने जाने वाले लक्ष्मी नारायण उर्फ पप्पू बंसल ने ईडी को चौंकाने वाला बयान दिया है। पप्पू बंसल ने स्वीकार किया है कि उन्हें शराब घोटाले से तीन महीनों के भीतर ₹136 करोड़ मिले। यह राशि अनवर ढेबर और नितेश पुरोहित के जरिए पहुंचाई गई थी।

 

₹1000 करोड़ का चौंकाने वाला आरोप

सबसे बड़ा खुलासा यह है कि पप्पू बंसल के बयान में चैतन्य बघेल का नाम सामने आया, जिसमें उन्होंने कहा कि इस पूरे सिंडिकेट के जरिए चैतन्य को करीब ₹1000 करोड़ मिले। इसके अलावा केके श्रीवास्तव नामक एक कथित तांत्रिक ने भी ईडी को बताया कि उसे चैतन्य बघेल के माध्यम से ₹100 करोड़ मिले थे, जिसे उसने कई प्रोजेक्ट्स में निवेश किया।

चैतन्य के रियल एस्टेट कारोबार पर ईडी की नजर

ईडी के पास सबूत हैं कि चैतन्य बघेल ने इन पैसों का निवेश रियल एस्टेट सेक्टर और अन्य व्यवसायों में किया। रिपोर्ट के मुताबिक, दुर्ग के एक बड़े सराफा कारोबारी ने स्वीकार किया है कि चैतन्य ने उन्हें ₹5 करोड़ बिना ब्याज के कर्ज दिया, जो अब तक वापस नहीं किया गया है।

इसके अलावा, एक प्रमुख प्रोजेक्ट ‘विट्ठल ग्रीन सिटी’, जिसकी लागत ₹1300 करोड़ बताई जा रही है, वह चैतन्य की कंपनी बघेल बिल्डकॉम से जुड़ा हुआ है। ईडी को ₹16.70 करोड़ के संदिग्ध लेनदेन के भी सबूत मिले हैं, जिसे उन्होंने अवैध कमाई का आधार माना है।

 

ईडी की दलील और कोर्ट की रिमांड

ईडी के वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. सौरभ पांडे ने कोर्ट में बताया कि ₹16.70 करोड़ की राशि अपराध से अर्जित की गई है और चैतन्य इसे सही तरीके से साबित नहीं कर पाए। इसी आधार पर उनकी गिरफ्तारी की गई। ईडी ने कहा कि यह केवल शुरुआती आंकड़ा है, बाकी की जांच अभी जारी है।

 

पप्पू बंसल बने सरकारी गवाह?

सूत्रों की मानें तो पप्पू बंसल अब इस पूरे केस में सरकारी गवाह बन सकते हैं। उनका बयान इस पूरी जांच की धुरी बन चुका है। उन्होंने न केवल पैसे की आवाजाही का खुलासा किया है, बल्कि यह भी बताया है कि हर माह दो बार ₹10 करोड़ भेजे जाते थे, जो तय जगहों पर पहुंचाए जाते थे। इन पैसों का इस्तेमाल निवेश और अन्य कार्यों में किया जाता था।

 

कांग्रेस का बचाव और भाजपा का हमला

इस बीच कांग्रेस नेताओं ने चैतन्य की गिरफ्तारी को राजनीति से प्रेरित बताया है। उनका कहना है कि चैतन्य एक किसान है, उसका किसी घोटाले से कोई संबंध नहीं। वहीं छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि “कानून अपना काम कर रहा है। अगर किसी ने भ्रष्टाचार किया है तो वह कानून की पकड़ में जरूर आएगा, चाहे वह किसी भी पार्टी का क्यों न हो।”

 

आगे क्या?

अब देखने वाली बात यह है कि अगले चार दिनों में ईडी की पूछताछ से और क्या-क्या खुलासे होते हैं। क्या चैतन्य की रिमांड बढ़ेगी? क्या और गिरफ्तारी संभव है? और क्या वाकई पप्पू बंसल सरकारी गवाह बन चुके हैं? ये सारे सवाल आने वाले दिनों में साफ होंगे।

 

 

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