यूक्रेन में युद्ध विराम की कोशिश या हथियारों की राजनीति? ट्रंप का नया दांव और पैट्रियट डील का गेमप्लान
रूस-यूक्रेन जंग के बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का पलटी मार रुख, पैट्रियट मिसाइल डील से नाटो देशों को साधने की कवायद, पुतिन-ज़ेलेंस्की के बीच शांति या नया मोर्चा?
ट्रंप को चैन क्यों नहीं आता?
डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर चर्चा में हैं। जहां दुनिया किसी भी संघर्ष से थक चुकी है, ट्रंप वहां खुद को निर्णायक बनाने से नहीं चूकते। भारत-पाकिस्तान हो या ईरान-इज़राइल, टीआरसी-रवांडा हो या रूस-यूक्रेन, ट्रंप खुद को हर समस्या का समाधान मानते हैं। ग़ज़ा अपवाद है, वहां वह नेतन्याहू के साथ खड़े हैं – बेहद स्पष्ट रूप से।
यूक्रेन पर ट्रंप का यूटर्न
राष्ट्रपति बनने से पहले से ही ट्रंप दावा करते रहे हैं कि अगर वह सत्ता में आए तो युद्ध रुक जाएगा। लेकिन 2024 के चुनावों के बाद से अमेरिका, यूक्रेन पर दबाव बनाता आ रहा है। ट्रंप की सोच ज़ेलेंस्की को जिम्मेदार ठहराती है, जबकि बाइडन प्रशासन रूस को आक्रांता मानता है।
पुतिन और ट्रंप के बीच कई फोन कॉल्स और सऊदी अरब में प्रतिनिधि स्तर पर मीटिंग्स हुईं, लेकिन जमीनी नतीजा नहीं निकला। ज़ेलेंस्की को डील पर मजबूर किया गया, मिनरल डील स्वीकार करवाई गई, लेकिन रूस ने मार्च 2025 की आंशिक सीजफायर तक को गंभीरता से नहीं लिया।
अब ट्रंप का नया ‘दोस्ती का हाथ’
14 जुलाई 2025 को ओवल ऑफिस में नाटो प्रमुख मार्क रूटा से मुलाकात के बाद ट्रंप ने ऐलान किया कि अमेरिका नाटो देशों के माध्यम से यूक्रेन को पैट्रियट मिसाइल डिफेंस सिस्टम देगा। सीधे तौर पर अमेरिका हथियार नहीं देगा, बल्कि नाटो देश अपनी बैटरीज़ देंगे और अमेरिका से नई खरीद लेंगे। यानी एक तरफ मदद, दूसरी ओर अमेरिकी हथियार कंपनियों के लिए धंधा।
पैट्रियट डिफेंस सिस्टम: क्या है और कितना कारगर?
पैट्रियट एक एडवांस एयर और मिसाइल डिफेंस सिस्टम है जिसे अमेरिकी कंपनी रेथियोन बनाती है। इसका काम दुश्मन के एयरक्राफ्ट, ड्रोन्स और मिसाइल्स को ट्रैक कर उन्हें मार गिराना है।
एक बैटरी में 6-8 लॉन्चर होते हैं।
हर लॉन्चर में 16 मिसाइल्स लगती हैं।
ऑपरेशन के लिए सिर्फ़ 3 सैनिक पर्याप्त होते हैं।
एक बैटरी की कीमत लगभग $1 बिलियन है।
हालांकि, यूक्रेन जैसे विशाल देश के लिए एक या दो बैटरी पर्याप्त नहीं। कवरेज टेरेन पर भी निर्भर करता है।
पैट्रियट: ढाल है, भाला नहीं
रूस के खिलाफ पैट्रियट जैसे सिस्टम डिफेंसिव हैं, यानी सिर्फ बचाव करते हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध मुख्य रूप से ड्रोन और आर्टिलरी पर आधारित है। इसलिए ट्रंप की इस पेशकश को निर्णायक हथियार नहीं कहा जा सकता।
क्या यह गेमप्लान पहले से था?
वॉशिंगटन जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, 11 जुलाई को रूस के हमलों की एक वीडियो देखने के बाद ट्रंप ने जर्मन चांसलर फेडरिक मर्ज को फोन किया और नाराज़गी जताई। इसके बाद यूक्रेन के लिए फंडिंग पर सहमति बनी – जर्मनी हथियारों के लिए भुगतान करेगा, अमेरिकी कंपनियों से सौदा होगा।
यूरोप ने ट्रंप को ‘सेट’ किया या ट्रंप ने यूरोप को?
25 जून को नाटो समिट में सदस्य देशों ने ट्रंप की मांग मानते हुए जीडीपी का 5% रक्षा पर खर्च करने का वादा किया। यूरोपीय लीडर्स ने ज़ेलेंस्की को ट्रंप से सीधे बात करने के लिए मनाया, और पुतिन से बिना शर्त वार्ता का दबाव भी बनाया।
अब सवाल उठता है:
क्या ट्रंप का रुख स्थायी है?
क्या यह केवल पुतिन पर प्रेशर बनाने की रणनीति है?
या यह अमेरिकी हथियार उद्योग को फायदा पहुंचाने की चाल?
रूस की प्रतिक्रिया: विरोध, व्यंग्य और गंभीरता
रूसी प्रवक्ता दमित्री पेसकोव ने ट्रंप के बयानों को “गंभीर” बताया लेकिन साथ ही समय मांगा। वहीं, पुतिन के करीबी दमित्री मेदवेदेव ने इसे “ड्रामैटिक अल्टीमेटम” कहकर खारिज किया। रूसी विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप की बातों को गंभीरता से लेने की ज़रूरत नहीं।
ट्रंप का घरेलू समर्थन भी बढ़ा
अमेरिका में डेमोक्रेट्स तक ट्रंप के इस कदम की तारीफ़ कर रहे हैं। सीनेटर दीम शाहिन ने कहा, यह फैसला पहले लिया जाना चाहिए था। अब यूक्रेन को दीर्घकालिक सैन्य सहायता की ज़रूरत है ताकि पुतिन को युद्ध खत्म करने पर मजबूर किया जा सके।
निष्कर्ष:
ट्रंप की यूक्रेन नीति अब दोस्ताना दिख रही है, लेकिन इसकी विश्वसनीयता संदेह में है।
यह साफ़ है कि ट्रंप की रणनीति में रक्षा कारोबार, नाटो सहयोग और घरेलू राजनीति का मेल है। सवाल यह नहीं है कि पैट्रियट डिफेंस सिस्टम से रूस रुकेगा या नहीं – सवाल यह है कि क्या इस ‘ढाल’ के पीछे कोई ‘भाला’ छिपा है?