बीजापुर दंतेवाड़ा फिर शुरू हुआ सैन्य ऑपरेशन,

बीजापुर/दंतेवाड़ा

इंद्रावती टाइगर रिज़र्व में फिर शुरू हुआ बड़ा सैन्य ऑपरेशन, पहले दिन एक माओवादी ढेर । बीजापुर और दंतेवाड़ा की संयुक्त कार्रवाई, इलाके में बड़े माओवादी नेता के फँसने की आशंका

बीजापुर/देंतवाडा, छत्तीसगढ़ के बीजापुर और दंतेवाड़ा जिलों में स्थित इंद्रावती टाइगर रिज़र्व के घने जंगलों में एक बार फिर सुरक्षाबलों ने माओवादियों के खिलाफ बड़ा ऑपरेशन शुरू कर दिया है। इस ऑपरेशन का आज पहला दिन था, और शुरुआती सफलता के तौर पर जवानों ने एक माओवादी को ढेर कर उसका हथियार और शव बरामद किया है।

बीजापुर पुलिस अधीक्षक जितेंद्र यादव से मिली जानकारी के मुताबिक, सुरक्षाबल फिलहाल ऑपरेशन स्थल से मुख्यालय की ओर लौट रहे हैं। मारे गए माओवादी की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है और पुलिस ने आधिकारिक तौर पर इस पर कोई बयान जारी नहीं किया है। एक संक्षिप्त प्रेस नोट के माध्यम से यह जानकारी साझा की गई है कि ऑपरेशन जारी है और सुरक्षाबलों ने एक माओवादी को मार गिराया है।

पुराने मुठभेड़ों की पुनरावृत्ति का संकेत

गौरतलब है कि बीते महीनों में इसी इलाके में एक लंबा ऑपरेशन चला था, जिसमें केंद्रीय कमेटी के शीर्ष माओवादी नेता सुधाकर और भास्कर मारे गए थे। वह ऑपरेशन तीन दिन तक चला था, जिसमें कुल सात माओवादियों के मारे जाने का दावा किया गया था। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि वर्तमान ऑपरेशन भी उसी स्तर का हो सकता है।

सूत्रों के अनुसार, खुफिया जानकारी के आधार पर यह अंदेशा है कि इस बार भी कोई बड़ा माओवादी नेता जंगलों में फंसा हुआ हो सकता है। यही वजह है कि सुरक्षा बल इस ऑपरेशन को लंबे समय तक चलाने की तैयारी में हैं।

शांति वार्ता की संभावनाएं लगभग खत्म

हाल के दिनों में माओवादियों की ओर से शांति वार्ता को लेकर भेजे गए पत्रों में भी ठहराव आ गया है। पहले जो पत्र तेलुगु भाषा में मिले थे, उनके अनुवाद की कोशिश की जा रही है, लेकिन माओवादी संगठन की गतिविधियों से यह स्पष्ट हो रहा है कि उन्होंने फिलहाल शांति वार्ता की संभावना से मुंह मोड़ लिया है।

माओवादियों की ओर से हाल ही में एक ग्रामीण की हत्या और एक IED विस्फोट की घटना सामने आई है, जिससे यह साबित होता है कि माओवादी संगठन अब फिर से हिंसक गतिविधियों में सक्रिय हो गया है। वहीं दूसरी ओर, सरकार ने भी साफ संकेत दे दिए हैं कि अब बिना हथियार छोड़े किसी तरह की बातचीत की गुंजाइश नहीं है।

सरकार का रुख सख्त, जवानों की पकड़ मजबूत

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने हाल ही में तेलंगाना में दिए गए बयान में स्पष्ट कहा कि अगर माओवादी हथियार डालकर मुख्यधारा में लौटते हैं, तभी बातचीत संभव है। वरना, सरकार किसी भी हाल में हिंसा के साथ बातचीत नहीं करेगी। छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री विजय शर्मा पहले वीडियो कॉल के माध्यम से संवाद की बात करते थे, लेकिन अब सरकार का यह रुख बदल चुका है।

जवान अब बस्तर और दंडकारण्य जैसे इलाकों में भी सफल ऑपरेशन अंजाम देने लगे हैं, जहाँ पहले माओवादियों का दबदबा हुआ करता था और सुरक्षाबलों को घुसना भी जोखिम भरा माना जाता था। अब स्थिति बदल रही है — जो इलाके माओवादियों के लिए सुरक्षित माने जाते थे, वहां भी जवान सफलतापूर्वक ऑपरेशन चला रहे हैं।

माओवादियों का पलटवार और हिंसा का नया दौर

हाल ही में कोरमा क्षेत्र में तीन लोगों की हत्या माओवादियों ने की थी। इसके पीछे संगठन ने प्रेस नोट जारी कर यह आरोप लगाया था कि इन लोगों को पुलिस ने अपने साथ जोड़ने की कोशिश की थी और उन्हें मुखबिर बनने के लिए पैसे दिए गए थे। इसीलिए उनकी हत्या की गई।

इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि दोनों पक्षों के बीच अब भी संघर्ष जारी है, और यह लड़ाई अब निर्णायक दौर में प्रवेश कर रही है।

निष्कर्ष ये है की :

इंद्रावती टाइगर रिज़र्व का यह ऑपरेशन आने वाले दिनों में कितना प्रभावशाली सिद्ध होता है, यह देखना अभी बाकी है। मगर इतना तो तय है कि सरकार और सुरक्षा बल अब माओवादियों के खिलाफ निर्णायक लड़ाई के मूड में हैं। माओवादी संगठन के लिए यह वक्त रणनीति पर फिर से सोचने का है, क्योंकि अब वो इलाका भी उनके लिए सुरक्षित नहीं बचा, जिसे कभी वो अपना गढ़ माना करते थे।

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