बालासोर की छात्रा की मौत से उठे कई सवाल

बालासोर की छात्रा की मौत

बालासोर की छात्रा की मौत से उठे कई सवाल: यौन उत्पीड़न, प्रताड़ना और सिस्टम की चुप्पी

भुवनेश्वर/बालासोर – उड़ीसा के बालासोर जिले से आई एक दिल दहला देने वाली खबर ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। फकीर मोहन ऑटोनॉमस कॉलेज की 20 वर्षीय छात्रा ने यौन उत्पीड़न और मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर कॉलेज परिसर में खुद को आग लगा ली थी। कई दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच जूझने के बाद एम्स भुवनेश्वर में उसकी मौत हो गई। यह घटना अब एक गंभीर सामाजिक और प्रशासनिक सवाल बनकर सामने आई है।

बताया जा रहा है कि यह छात्रा बीएड इंटीग्रेटेड कोर्स के सेकंड ईयर की छात्रा थी। उसने आरोप लगाया था कि कॉलेज प्रिंसिपल दिलीप घोष और शिक्षा विभाग के अधिकारी समीर साहू द्वारा उसे बार-बार धमकाया और यौन उत्पीड़न किया जा रहा था। छात्रा का आरोप था कि समीर साहू ने उससे यौन संबंध बनाने की मांग की थी, और मना करने पर उसका करियर बर्बाद करने की धमकी दी थी।

12 जुलाई को छात्रा ने विरोधस्वरूप कॉलेज कैंपस में खुद को आग लगा ली थी। गंभीर स्थिति में उसे पहले बालासोर जिला अस्पताल ले जाया गया और वहां से एम्स भुवनेश्वर रेफर किया गया। डॉक्टरों के मुताबिक, छात्रा के शरीर का 90% हिस्सा जल चुका था। उसे वेंटिलेटर पर रखा गया था और सभी अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएं प्रदान की गईं, लेकिन 14 जुलाई की देर रात करीब 11:45 बजे उसकी मौत हो गई।

इस घटना पर देशभर में प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी एम्स भुवनेश्वर पहुंचकर पीड़िता का हालचाल जाना था और मेडिकल स्टाफ को उचित दिशा-निर्देश भी दिए थे। वहीं, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस घटना को आत्महत्या नहीं, बल्कि “सिस्टम द्वारा की गई संगठित हत्या” बताया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि, “हर बार की तरह इस बार भी बीजेपी का सिस्टम आरोपियों को बचाता रहा। चुप्पी नहीं, जवाब चाहिए।”

छात्रा की मौत के बाद मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने दुख व्यक्त करते हुए परिवार को न्याय दिलाने का भरोसा दिलाया है। उन्होंने कहा कि दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने छात्रा के माता-पिता से मुलाकात भी की। वहीं, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी छात्रा की मौत पर गहरा दुख व्यक्त किया है।

विपक्ष के साथ-साथ आमजनता का भी सवाल यही है कि आखिर पीड़िता की शिकायत पर पहले ही कार्रवाई क्यों नहीं की गई? अगर समय रहते पुलिस और कॉलेज प्रशासन सक्रिय होता, तो क्या इस हादसे को टाला जा सकता था?

इस मामले में पुलिस ने प्रिंसिपल दिलीप घोष और शिक्षा अधिकारी समीर साहू को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों को निलंबित भी कर दिया गया है। साथ ही, मामले की विस्तृत जांच जारी है।

छात्रा की मौत सिर्फ एक घटना नहीं है, यह देश की उस व्यवस्था पर बड़ा सवाल है जो पीड़ित की पुकार को अनसुना करती है, और दोषियों को समय रहते कानून के शिकंजे में नहीं लाती।

यह घटना न केवल उड़ीसा, बल्कि पूरे देश की बेटियों की सुरक्षा, गरिमा और न्याय व्यवस्था को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े करती है। अब यह देखना अहम होगा कि जांच निष्पक्षता से होती है या एक बार फिर यह मामला भी कागजों में दफन हो जाएगा। देश की बेटियां अब चुप नहीं हैं—उन्हें इंसाफ चाहिए, और वह भी बिना देर किए।

 

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