जब सड़क बन गई नाली: जगदलपुर में इंजीनियरिंग की चूक, पानी बह रहा सड़क पर
जगदलपुर में सड़क से ऊंची नाली समस्या ने खोली नगर निगम की पोल
जगदलपुर (छत्तीसगढ़)। बारिश ने खोली ‘इंजीनियरिंग’ की पोल ,शहर के बीचों-बीच अगर कोई सड़क इस हालत में पहुंच जाए कि वह खुद एक नाली बन जाए, तो सवाल उठना लाज़िमी है – आखिर नगर निगम, इंजीनियर और पार्षद क्या कर रहे हैं? जबलपुर में एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जहां नाली को सड़क से एक से डेढ़ फीट ऊंचा बना दिया गया है। इसका नतीजा ये है कि बारिश का पानी नाली में जाने की बजाय सड़क से होकर बह रहा है, जिससे न केवल सड़क क्षतिग्रस्त हो रही है, बल्कि राहगीरों की जान भी खतरे में पड़ गई है।
बारिश ने खोली ‘इंजीनियरिंग’ की पोल
ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान देखा गया कि सड़क किनारे बनी नाली, जिसे बारिश के समय जल निकासी के लिए बनाया जाना था, सड़क की सतह से काफी ऊपर है। पानी को ढलान के साथ नाली में बहना चाहिए था, लेकिन यहां तो ढलान नाली से नीचे है। ऐसे में पानी सीधा सड़क पर भर जाता है, और पूरे रास्ते को गड्ढों और दलदल में तब्दील कर देता है।
स्थानीय निवासी बताते हैं कि ये समस्या कोई नई नहीं है। “ये हालत तो कई सालों से है। हर बारिश में पानी इसी तरह बहता है। नाली ऊंची बना दी गई है, तो पानी नाली में जाएगा कैसे?” – एक बुज़ुर्ग निवासी ने बताया। उन्होंने यह भी कहा कि “अब तो खंभों से पानी निकलता दिखता है, जैसे कोई अजूबा हो!”
राहगीरों और स्कूली बच्चों के लिए खतरे की घंटी
स्कूल जाने वाले बच्चों और राहगीरों के लिए संकट
इस सड़क से होकर दर्जनों स्कूल जाने वाले बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग हर दिन गुजरते हैं। पानी में डूबी सड़क और छुपे हुए गड्ढे किसी भी दिन जानलेवा हादसे का कारण बन सकते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है:
“पानी खंभे से बह रहा है, नाली से नहीं। सड़क ही नाली बन चुकी है।”
“जूते पहनकर चलना मुश्किल है, गड्ढों का पता ही नहीं चलता।”
इस रास्ते से हर दिन स्कूली बच्चे, बुज़ुर्ग, और दोपहिया वाहन चालक गुजरते हैं। मगर पानी से लबालब भरे गड्ढों में हर कदम पर गिरने का खतरा बना रहता है। “जूते पहनकर चल नहीं सकते। पता नहीं कब कौन गिर जाए,” – एक स्थानीय माता-पिता ने बताया। गड्ढों की गहराई का अंदाज़ा पानी से भरे होने के कारण लगाना मुश्किल है। कई जगहों पर तो टेंट लगाकर रास्ता बंद कर दिया गया है, ताकि लोग दूसरी तरफ से निकल सकें। लेकिन यह कोई स्थायी समाधान नहीं है।
तीन बार से निर्वाचित पार्षद, लेकिन विकास आत पता नहीं।
सबसे बड़ी हैरानी की बात यह है कि यह इलाका एक ऐसे पार्षद के वार्ड में आता है जो तीन बार चुने जा चुके हैं। लोगों का आरोप है कि इतने वर्षों में न तो सड़क बनी और न ही नाली की ऊंचाई में सुधार किया गया।
“अगर शहर के बीच का हाल ऐसा है, तो ग्रामीण इलाकों की हालत का अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं है,” – एक स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा।
प्रशासन और ठेकेदारों की मिलीभगत?
नाली की ऊंचाई को लेकर सवाल सिर्फ इंजीनियरों की योग्यता पर नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की जवाबदेही पर खड़े होते हैं। क्या नाली डिजाइन करने वाले इंजीनियर ने सड़क के लेवल की जाँच नहीं की? या फिर ठेकेदारों ने मनमर्जी से निर्माण कर दिया और किसी ने निरीक्षण तक नहीं किया?
स्थानीय लोगों ने इसे “वाट्सऐप इंजीनियरिंग” का नाम दिया है – यानी जो समझ आया, बना दिया, परिणाम की किसी को चिंता नहीं।
आगे क्या? कब सुधरेंगे हालात?
अब सवाल उठता है कि क्या इस पर कोई कार्रवाई होगी? क्या नगर निगम, पार्षद और ठेकेदारों से जवाब मांगा जाएगा? या फिर जब तक कोई बड़ा हादसा नहीं हो जाता, तब तक सब चुप बैठे रहेंगे?
सड़क और नाली की इस हालत को देखते हुए ज़रूरी है कि तत्काल:
नाली की ऊंचाई को सड़क से नीचे किया जाए,
पानी की निकासी के लिए उचित ढलान बनाया जाए,
सड़क की मरम्मत और गड्ढों को भरा जाए,
दोषी इंजीनियर और ठेकेदारों पर कार्रवाई की जाए।
निष्कर्ष:
इस पूरे मामले ने साफ कर दिया है कि जब तक योजनाएं ज़मीन पर उतरकर सही तरह से लागू नहीं होतीं, तब तक जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। जगदलपुर जैसी बड़ी नगर में अगर ऐसा हाल है, तो छोटे कस्बों और गांवों की स्थिति का अंदाज़ा लगाना कठिन नहीं है। जनता ने अब उम्मीद लगाई है कि मीडिया में खबर आने के बाद शायद प्रशासन की नींद खुले और कोई ठोस कदम उठाया जाए।