बीजापुर के इरपागुट गांव में फर्जी मुठभेड़ का आरोप ? आम आदमी पार्टी की जांच समिति ने उठाए गंभीर सवाल
फर्जी मुठभेड़ का आरोप,बीजापुर जिले के इरपागुट गांव में एक कथित मुठभेड़ में मारे गए महेश पुड़ियाम की मौत पर अब सवाल उठने लगे हैं। आम आदमी पार्टी (AAP) की जांच समिति ने इस घटना को फर्जी मुठभेड़ करार दिया है और निष्पक्ष न्यायिक जांच की मांग की है।
क्या है पूरा मामला?
6 जून को इरपागुट गांव निवासी महेश पुड़ियाम अपने घर से महज आधा किलोमीटर दूर भैंसा ढूंढने गया था, लेकिन वापस नहीं लौटा। गांववालों ने बताया कि उसी समय गोलियों की आवाज़ें सुनाई दी थीं। 7 जून को उसका कोई सुराग नहीं मिला, लेकिन उसी दिन पास के गांव आड़पल्ली से लौट रहे मिट्टा शैलेश ने परिवार को बताया कि महेश को पुलिस द्वारा पकड़े जाने की बात उसने देखी थी।
8 जून को जब परिवार बीजापुर पहुंचा और पुलिस से संपर्क किया, तब उन्हें बताया गया कि महेश को एक लाख रुपए के इनामी नक्सली के तौर पर मुठभेड़ में मार गिराया गया है।
जांच समिति की रिपोर्ट में क्या निकला सामने?
आम आदमी पार्टी की ओर से गठित जांच समिति ने 5 दिनों तक बीजापुर के इरपागुट गांव में रहकर परिजनों, ग्रामीणों और स्थानीय शिक्षकों से बातचीत की। समिति की अध्यक्ष गंगपा शुक्ला के नेतृत्व में यह टीम अब रायपुर लौटी है और इस पूरे घटनाक्रम पर प्रेस को संबोधित किया।
जांच समिति ने कुछ अहम तथ्यों की ओर ध्यान दिलाया:
*महेश पुड़ियाम कोई नक्सली नहीं बल्कि स्कूल में रसोईया का काम करता था।
*उसके बैंक खाते में नियमित वेतन का भुगतान हो रहा था।
*उसका पूरा परिवार सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों में शामिल था।
*महेश के सात बच्चे हैं, जिनमें सबसे बड़ा 12 साल का और सबसे छोटा 6 माह का है।
*गांव के शिक्षक नागेश विलाजी ने भी पुष्टि की कि महेश कभी नक्सली गतिविधियों में शामिल नहीं था।
स्थिति बेहद दयनीय
महेश पुड़ियाम की पत्नी सुमित्रा पुयाम और उनके बच्चों की स्थिति बेहद गंभीर और गरीबी से जूझती हुई पाई गई। बच्चों के पास कपड़े तक नहीं हैं और भरपेट भोजन मिलना भी मुश्किल है। घर की हालत झोपड़ी जैसी है, जिससे यह साफ होता है कि परिवार बेहद कठिनाई में जी रहा है।
आम आदमी पार्टी की मांग
जांच समिति ने सरकार से मांग की है:
1. 1 करोड़ रुपए का मुआवजा दिया जाए।
2. महेश की पत्नी को सरकारी नौकरी दी जाए।
3. सातों बच्चों की शिक्षा, पालन-पोषण की पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार उठाए।
4. न्यायिक जांच आयोग का गठन कर फर्जी मुठभेड़ की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
पिछले फर्जी मुठभेड़ों की भी याद दिलाई
गंगपा शुक्ला ने सारकेगुड़ा (2012) और एड़ीसमेटा (2013) जैसी घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में पहले भी फर्जी मुठभेड़ों की पुष्टि हुई है। उन्होंने कहा कि जैसे उन मामलों में आयोग गठित हुए, वैसे ही इस मामले में भी निष्पक्ष न्यायिक जांच आवश्यक है।
कानूनी लड़ाई के लिए भी तैयार
आम आदमी पार्टी ने यह भी कहा है कि यदि परिवार न्याय चाहता है, तो पार्टी पूरी कानूनी सहायता देने के लिए तैयार है। अभी तक बारिश के कारण परिजन थाने नहीं पहुंच पाए हैं, लेकिन भविष्य में वे शिकायत दर्ज कराने के लिए आगे आ सकते हैं।
निष्कर्ष:
छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के इरपागुट गांव में कथित मुठभेड़ में मारे गए महेश पुड़ियाम को लेकर आम आदमी पार्टी ने जांच समिति की रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट में फर्जी मुठभेड़ की आशंका जताई गई है और न्यायिक जांच की मांग की गई है।
बीजापुर की यह घटना न केवल आदिवासी क्षेत्र में हो रहे कथित अत्याचारों को उजागर करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि कैसे एक गरीब परिवार को न्याय पाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। अब देखने वाली बात होगी कि क्या छत्तीसगढ़ सरकार इस मामले में न्यायिक जांच का आदेश देती है या नहीं।