प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना की हकीकत छत्तीसगढ़ में

1000 साल लगेंगे? छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना की हकीकत जानिए

 

प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना

केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना मुफ्त बिजली को लेकर जोर शोर से प्रचार किया जा रहा है। टीवी, रेडियो, अखबार और सोशल मीडिया पर इस योजना के विज्ञापन लगातार दिखाए जा रहे हैं। दावा है कि इस योजना से देश के करोड़ों परिवारों को फायदा होगा, बिजली बिल से मुक्ति मिलेगी और हर साल हजारों करोड़ रुपए की बचत होगी। लेकिन जब जमीन पर इसकी हकीकत देखी गई, खासकर छत्तीसगढ़ में, तो तस्वीर कुछ और ही नजर आई।

क्या है प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना?

इस योजना का उद्देश्य है कि 2027 तक 1 करोड़ घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाए जाएं। सरकार के अनुसार, इससे हर साल लगभग ₹75 अरब की बचत होगी। केंद्र सरकार सोलर पैनल की लागत पर सब्सिडी भी देती है:

1 किलोवाट सोलर पैनल पर ₹30,000 की सब्सिडी

2 से 3 किलोवाट पर ₹60,000 तक

3 किलोवाट से ऊपर के पैनल पर ₹78,000 तक की सब्सिडी

इसके साथ-साथ हर परिवार को 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने का भी प्रावधान है। सरकार सीधे बैंक खाते में राशि ट्रांसफर करती है और जरूरतमंदों को आसान लोन सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है।

छत्तीसगढ़ की जमीनी सच्चाई: सिर्फ 7 लाभार्थी रोज

22 फरवरी 2024 को लॉन्च की गई इस योजना को 30 जून 2025 तक कुल 494 दिन हो चुके हैं। इस दौरान छत्तीसगढ़ से कुल 43,149 आवेदन आए लेकिन सिर्फ 3,590 घरों में सोलर पैनल लग पाए हैं। यानी औसतन हर दिन सिर्फ 7 परिवार ही इस योजना का लाभ ले पाए।

छत्तीसगढ़ जैसे राज्य, जहां 50 लाख से अधिक घरेलू उपभोक्ता हैं, अगर इसी रफ्तार से योजना आगे बढ़ी तो:

सभी घरों तक योजना पहुंचाने में 2,000 साल लग सकते हैं

और अगर सिर्फ 25% घरों तक योजना पहुंचानी हो, तो 500 साल भी कम नहीं होंगे

क्यों नहीं उठा पा रहे लोग योजना का लाभ?

क्यों नहीं उठा पा रहे लोग योजना का लाभ?

योजना की असली समस्या यह है कि इसे ‘मुफ्त’ योजना बताकर प्रचारित तो किया गया, लेकिन हकीकत में लाभार्थी को अपने खर्च से भी पैसे लगाने पड़ते हैं।

उदाहरण के लिए:

3 किलोवाट सोलर पैनल की लागत ₹1.5 लाख

केंद्र सरकार देती है ₹78,000 की सब्सिडी

बाकी ₹67,000 उपभोक्ता को अपनी जेब से चुकाने होते हैं

इस कारण योजना का सबसे बड़ा दावा – गरीबों को लाभ – हवा हो जाता है। गरीब या निम्न-मध्यम वर्ग के लिए यह रकम जुटा पाना आसान नहीं है।

राज्यों में प्रदर्शन: छत्तीसगढ़ 18 वें स्थान पर

 

भारत सरकार के आंकड़ों के मुताबिक:

*गुजरात: 3,70,123 लाभार्थी

*महाराष्ट्र: 2,24,390

*उत्तर प्रदेश: 1,54,612

*केरल: 1,12,699

*मध्य प्रदेश: 45,612

छत्तीसगढ़ का स्थान है 18 वां, जो योजना की धीमी रफ्तार को दर्शाता है।

डबल सब्सिडी की घोषणा और नया टारगेट

छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना की धीमी रफ्तार को देखते हुए अब डबल सब्सिडी देने का ऐलान किया है। यानी केंद्र की सब्सिडी के अलावा राज्य भी आर्थिक मदद देगा।

राज्य सरकार का लक्ष्य है कि 2026 तक 1,25,000 घरों में सोलर पैनल लगाए जाएं। लेकिन पिछले 17 महीनों में सिर्फ 3,590 घरों तक योजना पहुंची है, तो आने वाले 8 महीनों में 1.21 लाख घरों तक पहुंचना लगभग असंभव प्रतीत होता है।

निष्कर्ष: योजना अच्छी है, पर जमीनी हकीकत यह है कि अच्छे से लाभ ही नहीं मिल पा रहा ।।

प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना एक अच्छी पहल है, लेकिन इसका क्रियान्वयन बेहद कमजोर नजर आता है। खासकर छत्तीसगढ़ में, जहां संसाधनों और जागरूकता की कमी योजना की सबसे बड़ी बाधा बन रही है। सरकारी आंकड़ों और दावों से परे, सच्चाई यही है कि बिना समुचित तैयारी, तकनीकी सहायता और आर्थिक मदद के यह योजना गरीबों तक नहीं पहुंच सकती। जब तक राज्य और केंद्र दोनों मिलकर व्यावहारिक रणनीति नहीं अपनाते, तब तक यह योजना लंबे समय तक सिर्फ कागजों में ही सजी नजर आएगी।

क्या आपने पीएम सूर्य घर योजना के लिए आवेदन किया है?

नीचे कमेंट में अपना अनुभव ज़रूर साझा करें या इस लेख को उन लोगों तक शेयर करें जिन्हें इसकी जरूरत है।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *