दुर्ग में लूटपाट की वारदात: फर्जी पुलिस बनकर महिला से 40 ग्राम सोने के चार कंगन उड़ा ले गए
दुर्ग, छत्तीसगढ़: शहर के वार्ड क्रमांक 13 के भोंय पारा गली में एक चौंकाने वाली लूटपाट की घटना सामने आई है, जिसमें दो नकाबपोश युवकों ने फर्जी पुलिसकर्मी बनकर एक 65 वर्षीय महिला को अपने जाल में फँसाया और उसके 40 ग्राम वजन के चार सोने के कंगन चुराकर फरार हो गए।
क्या है पूरी घटना?
घटना मंगलवार सुबह की है जब 65 वर्षीय शीला देवी मंदिर में पूजा अर्चना कर घर लौट रही थीं। सावन का पावन महीना होने के कारण वह नियमित रूप से पूजा-पाठ करती हैं। सुबह क़रीब 9:30 बजे के आसपास जब वह अपने घर की ओर जा रही थीं, तभी रास्ते में दो युवक आए, जिनमें से एक ने इशारा कर कहा, “साहब बुला रहे हैं।”
महिला के अनुसार, दोनों युवक नकाबपोश थे, सिर पर कपड़ा बंधा हुआ था, चेहरा मास्क और चश्मे से ढका हुआ था। उन्होंने खुद को पुलिसकर्मी बताया और एक फर्जी आईडी भी दिखाई। फिर झूठी कहानी सुनाते हुए कहा कि उसी इलाके में हत्या हुई है और स्थिति गंभीर है। डर फैलाते हुए उन्होंने कहा कि यदि महिला ने अपने गहने नहीं उतारे, तो उसकी भी हत्या हो सकती है और उसके गहने लूट लिए जाएंगे।
धोखे से बदली गई असली चूड़ियाँ
डर के मारे शीला देवी ने अपने चारों कंगन उतारकर अपने बैग में रखना चाहा, तभी युवकों ने उन्हें कहा कि कंगन को कागज़ में लपेट लें ताकि कोई न देखे। उन्होंने कागज़ का एक टुकड़ा देकर कंगन उसमें रखने को कहा। इसी दौरान, चालाकी से उन्होंने असली कंगनों की जगह नकली चूड़ियाँ उस महिला को पकड़ा दी और मौके से फरार हो गए।
महिला को जब घर पहुँचने के बाद धोखे का एहसास हुआ, तो वह तुरंत पास ही रहने वाले वार्ड पार्षद संभव जैन के पास पहुँची और पूरी जानकारी दी। संभव जैन ने फौरन भिलाई भुरुख पुलिस थाना प्रभारी और सीएसपी क्राइम ब्रांच को जानकारी दी। पुलिस टीम कुछ ही देर में मौके पर पहुँच गई और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की मदद से संदिग्ध युवकों की पहचान की जा रही है।
वार्ड पार्षद का बयान
संभव जैन ने बताया,
> “करीब 9:30 बजे दादी जी (प्रार्थिया) मेरे पास आईं और घटना की जानकारी दी। मैंने तुरंत पुलिस को सूचना दी। 10-15 मिनट में ही टीम पहुँची और मामले की जाँच शुरू हुई। महिला के बताए अनुसार, चोरी गए कंगन शादी के समय उनके पिताजी ने उन्हें दिए थे, जिनका भावनात्मक मूल्य भी बहुत अधिक है।”
पीड़िता शीला देवी की आपबीती
रिपोर्टर से बातचीत में शीला देवी ने कहा,
> “मैं मंदिर से लौट रही थी, तभी दो लोग आए और बोले कि मर्डर हो गया है, सोना पहनकर मत जाओ, चोरी हो जाएगी। फिर बोले कि सोना कागज़ में रखो। मैं डर गई, उन्होंने जो कागज़ दिया, उसी में रखकर दे दिया और उन्होंने नकली चूड़ी मुझे पकड़ा दी। जब घर पहुँची तो असलियत समझ में आई।”
शीला देवी ने आगे बताया कि उन्होंने तुरंत पड़ोसियों को सूचना दी और संभव जैन को बताया। वहाँ के स्थानीय दुकान वालों ने भी पुष्टि की कि वही युवक कुछ देर पहले दुकान के पास कपड़े देखने के बहाने घूम रहे थे।
पुलिस की कार्रवाई जारी
दुर्ग के एडिशनल एसपी विजय रंगा राठौर ने बताया,
> “दो युवक महिला को झाँसे में लेकर खुद को पुलिसकर्मी बताकर वारदात को अंजाम देकर भाग गए। महिला के बयान के आधार पर एफआईआर दर्ज कर ली गई है। सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और मुखबिर तंत्र को सक्रिय कर दिया गया है। जल्द ही आरोपियों को पकड़ लिया जाएगा।”
समाज में डर और चिंता का माहौल
इस तरह की घटनाएँ न केवल कानून व्यवस्था पर सवाल उठाती हैं, बल्कि समाज में बुज़ुर्गों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता भी पैदा करती हैं। दिनदहाड़े भरे मोहल्ले में ऐसी वारदात होना बताता है कि अपराधियों के हौसले कितने बुलंद हैं।
पुलिस से उम्मीद की जा रही है कि जल्द से जल्द आरोपियों की गिरफ्तारी होगी और ऐसे अपराधों पर रोक लगाने के लिए सख्त कार्रवाई की जाएगी।