तमनार कोल परियोजना के खिलाफ गरजे लोग 

तमनार कोल परियोजना

तमनार कोल परियोजना के खिलाफ गरजा तमनार: जल, जंगल, और ज़मीन बचाने की लड़ाई तेज

छत्तीसगढ़(रायगढ़/तमनार )| विशेष रिपोर्ट

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के तमनार विकासखंड में इन दिनों ज़मीन, जंगल और आजीविका को बचाने की जंग तेज़ हो गई है। तमनार के 56 गाँवों पर कोल ब्लॉक परियोजनाओं का संकट गहराता जा रहा है, जिससे स्थानीय लोग सड़कों पर उतर आए हैं।

तमनार का विस्फोटक आंदोलन: जल, जंगल, ज़मीन बचाने के लिए ग्रामीणों ने ठानी लड़ाई”

ग्रामीणों का स्पष्ट संदेश है—”अब और नहीं, जंगल कट गए, लेकिन अब गाँव नहीं कटने देंगे।”

75,000 एकड़ जंगल समतल ज़मीन में तब्दील

गुंदा गाँव समेत कई क्षेत्रों में अब तक 75,000 एकड़ से ज्यादा जंगलों की कटाई हो चुकी है। जिन जगहों पर कभी घने वन थे, वहां अब समतल मैदान दिखता है। तमनार ब्लॉक के कुल 83 गाँव कोल ब्लॉक की चपेट में हैं। इनमें से कई पहले ही कोयला खदानों में तब्दील हो चुके हैं।

9 कोल परियोजनाएं, कई दिग्गज कंपनियों की भागीदारी

इस क्षेत्र में 9 बड़ी कोल परियोजनाएं संचालित हो रही हैं, जिनमें जिंदल स्टील एंड पावर, महाराष्ट्र स्टेट पावर (महाजनको), गुजरात स्टेट इलेक्ट्रिसिटी कॉर्पोरेशन, हिंडालको, अंबुजा सीमेंट जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं। हाल ही में जिंदल स्टील ने नागमूड़ा और गाजवीर पंचायतों में जंगल काटने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीणों के विरोध के चलते काम रोकना पड़ा।

सियासी हलचल: भूपेश बघेल और कांग्रेस विधायकों की उपस्थिति

भूपेश बघेल और कांग्रेस विधायकों की उपस्थिति

बीते दिनों, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 20 से अधिक कांग्रेस विधायकों के साथ मुंडा गाँव पहुंचे। उन्होंने सीधे तौर पर  एमडीओ और अडानी इंटरप्राइजेज पर जंगल और गाँव को तबाह करने का आरोप लगाया।

उन्होंने सवाल उठाया कि, “जंगल में वन विभाग की अनुमति के बिना प्रवेश तक मना है, फिर 26 और 27 जून को अडानी के लोग कैसे जंगल में दाखिल हुए? क्या सरकार उद्योगपतियों के दबाव में कानून को ताक पर रख रही है?”

पुलिस सुरक्षा में कट रहे जंगल?

स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का दावा है कि जंगलों की कटाई के दौरान 2000 पुलिसकर्मियों को सुरक्षा में लगाया गया था। जबकि यह क्षेत्र संवेदनशील वन क्षेत्र है और पेशा कानून के तहत ग्राम सभा की अनुमति के बिना कोई भी कार्य गैरकानूनी है।

फर्जी ग्राम सभा और एनओसी का आरोप

सामाजिक कार्यकर्ता राजेश त्रिपाठी का आरोप है कि अदानी के लोगो ने फर्जी ग्राम सभा की एनओसी के आधार पर काम शुरू किया। RTI से प्राप्त जानकारी में ग्राम पंचायतों ने स्पष्ट किया कि जिन तारीखों में सभा दिखलाई गई है, उस दिन कोई मीटिंग ही नहीं हुई।

वन और राजस्व विभाग ने अब तक इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, जिससे संदेह और भी गहरा हो गया है।

अधिक कोयला उत्पादन का खतरा

वर्तमान में रायगढ़ जिले की खदानों में लगभग 1600 लाख मीट्रिक टन कोयला उत्पादन हो रहा है, लेकिन केंद्र सरकार को प्रस्तावित उत्पादन 2000 लाख मीट्रिक टन तक बढ़ाने की योजना है। इससे क्षेत्र में पर्यावरणीय क्षति, भूमिगत जल स्तर में गिरावट, और विस्थापन की समस्या और बढ़ेगी।

जल, जंगल, ज़मीन बचाओ मोर्चा का गठन

स्थानीय ग्रामीणों ने अब संगठित होकर ‘जल, जंगल, ज़मीन बचाओ मोर्चा’ के बैनर तले आंदोलन छेड़ दिया है। वे ना केवल अपने गाँव, बल्कि पूरे तमनार ब्लॉक को बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं।

ग्रामीणों ने कलेक्टर से मिलकर ज्ञापन सौंपा है और स्पष्ट कहा है— “जितना नुकसान होना था, हो गया। अब हम और बर्बादी नहीं सहेंगे।”

यह केवल एक क्षेत्र की नहीं, पूरे देश की लड़ाई है

तमनार का यह आंदोलन सिर्फ एक भू-भाग या समुदाय की लड़ाई नहीं है। यह एक मिसाल बनता जा रहा है कि किस तरह से ग्रामीण, पर्यावरण प्रेमी और सामाजिक कार्यकर्ता मिलकर विकास की आड़ में हो रहे अंधाधुंध दोहन के खिलाफ खड़े हो सकते हैं।

निष्कर्ष:

तमनार में कोल परियोजनाओं के खिलाफ यह संघर्ष अब सिर्फ स्थानीय मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह पूरे देश में विकास बनाम पर्यावरण की बहस का हिस्सा बनता जा रहा है। आने वाले समय में यह आंदोलन और भी तेज़ हो सकता है, और यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार, प्रशासन और न्यायपालिका इस पर क्या रुख अपनाते हैं।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *