हैरान कर देने वाला मर्डर केस: बहू और हारमोनियम मास्टर ने मिलकर ससुर को दी दर्दनाक मौत, गांव की सतर्कता से खुला राज़।
डौंडीलोहारा, छत्तीसगढ़ |16 जुलाई की रात एक साजिश अपने अंजाम तक पहुंची। 65 वर्षीय मनोहर निर्मलकर की मौत को पहले एक सामान्य मौत बताया गया। लेकिन गांव वालों की सतर्कता, चेहरे पर लगी हल्दी-गुलाल और एक बाहरी व्यक्ति की हड़बड़ी ने पूरे मामले को हत्या में बदल दिया।
शुरुआत: कब और क्यों बनी मर्डर की योजना?
29 जून को हत्या की साजिश रची गई। गीता निर्मलकर और लेखराम निषाद ने मिलकर अपने ससुर मनोहर निर्मलकर को रास्ते से हटाने का प्लान बनाया। वजह थी मनोहर की आपत्ति—अपनी बहू गीता और मंडली के हारमोनियम मास्टर लेखराम के बीच बढ़ती नजदीकियों पर। लेखराम अक्सर रात को गीता को हारमोनियम सिखाने उसके घर आता था। कई बार देर रात तक रुकता था। मनोहर ने कई बार टोका, लेकिन गीता और लेखराम को यह बात चुभने लगी।
मर्डर की प्लानिंग: करंट से मौत का खेल
प्लान था—मनोहर को इलेक्ट्रिक करंट देकर मारने का। करंट से मौत दिखेगी “सामान्य”, चोट का कोई निशान नहीं, और बिना किसी शक के अंतिम संस्कार कर दिया जाएगा। इसके लिए लेखराम ने बिजली की दुकान से एक लंबा तार, बिजली कर्मचारी वाला ग्लव्स और एक रॉड खरीदा। सब सामान पहले से घर में छिपाकर रख लिया गया।
16 जुलाई की रात मौका मिल गया—मनोहर शराब पीकर खाना खाकर सो गया था। गीता ने लेखराम को फोन किया, और रात करीब 11 बजे वह घर आ गया।
पहले गीता ने अपने ससुर के मुंह में कपड़ा ठूंसा ताकि कोई आवाज न निकले।
लेखराम ने तार को प्लग से जोड़ा और रॉड से करंट दिया।
पहले गले पर, फिर पेट और चेहरे पर लगातार एक से डेढ़ मिनट तक झटका दिया गया।
साजिश में गड़बड़ी: शरीर पर दिखने लगे चोट के निशान
जो साजिश ‘सामान्य मौत’ दिखाने के लिए रची गई थी, वो अब फंसने लगी थी। करंट देने से शरीर के कई हिस्सों में निशान पड़ गए थे—चेहरे, गले और पेट पर। अब इनका प्लान-A फेल हो चुका था।
प्लान-B: कहानी गढ़ी गई – “शराब पीकर साइकिल से गिरा”
रात 3 बजे तक दोनों ने नया प्लान बनाया। सुबह गांव वालों को बताया जाएगा कि मनोहर शराब पीकर साइकिल से गिरा और सुबह नहीं उठा। इसलिए शरीर पर चोट के निशान हैं।
सुबह 6 बजे गीता ने गांव वालों को मौत की जानकारी दी। लेकिन बिना मुनादी कराए ही लेखराम अंतिम संस्कार की तैयारी में जुट गया। खुद ही लकड़ी और चिता का इंतज़ाम कर रखा था, जो गांव की परंपरा के विपरीत था।
गुलाल-हल्दी से जागा शक: गांव वालों ने रोकी चिता
जब शव को मुक्तिधाम ले जाया जा रहा था, गांव वालों ने देखा—
मृतक के चेहरे पर पहले से हल्दी और गुलाल लगे हुए थे।
लेखराम, जो न तो रिश्तेदार था, न गांव का स्थायी निवासी—सबसे ज्यादा हड़बड़ाहट में था।
गांव वालों को शक हुआ और तुरंत डौंडीलोहारा थाने को सूचना दी गई। पुलिस मौके पर पहुंची, शव को चिता से हटवाया गया।
पूछताछ में टूटी साजिश: गीता और लेखराम ने कर लिया कबूल
पुलिस ने गीता और लेखराम से पूछताछ की। गांव वालों के बयानों और सबूतों के आधार पर जब पुलिस ने दबाव बनाया, तो दोनों टूट गए और पूरे मर्डर की कहानी कबूल कर ली।
उन्होंने बताया कि कैसे करंट देने की योजना बनाई गई थी, कैसे सामान खरीदा गया, कैसे हत्या की गई और कैसे उसे सामान्य मौत साबित करने की कोशिश की गई।
निष्कर्ष: गांव वालों की सतर्कता और परंपरा निभाने की ईमानदारी से खुला यह राज़
अगर गांव वाले ध्यान न देते, अगर मुनादी की परंपरा और अंतिम संस्कार की रीतियों पर सवाल न उठाते, तो शायद यह हत्या एक रहस्य बनकर ही रह जाती।
अब यह मामला हत्या का बन चुका है और पुलिस ने दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर न्यायिक कार्यवाही शुरू कर दी है।
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