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ट्रंप की नई टैरिफ नीति और भारत से संभावित डील

ट्रंप की नई टैरिफ नीति

ट्रंप की नई टैरिफ नीति और भारत से संभावित डील: क्या बदलेगा भारत-अमेरिका व्यापार समीकरण?

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति और संभावित रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर वैश्विक व्यापार जगत में हलचल मचा दी है। 8 जुलाई को एक वीडियो सामने आया जिसमें ट्रंप ने यह खुलासा किया कि अमेरिका ने यूनाइटेड किंगडम और चीन के साथ व्यापार समझौता कर लिया है और अब भारत के साथ ट्रेड डील की तैयारी अंतिम चरण में है। हालांकि, भारत पर कितना टैरिफ लगाया जाएगा, इस पर अभी तक कोई स्पष्टता नहीं है।

इस वीडियो से ठीक पहले ट्रंप ने सोशल मीडिया पर बैक-टू-बैक कई टैरिफ लेटर्स साझा किए, जो अमेरिका द्वारा विभिन्न देशों को भेजे गए हैं। इन पत्रों में 14 देशों पर भारी-भरकम टैरिफ लगाए जाने की घोषणा की गई है। इन देशों पर यह नए टैरिफ 1 अगस्त 2025 से लागू होंगे।

ट्रंप की टैरिफ नीति: किस देश पर कितना टैरिफ?

ट्रंप की नई घोषणा के अनुसार, अमेरिका ने निम्नलिखित देशों पर टैरिफ लगाए हैं:

दक्षिण कोरिया – 25%

जापान – 25%

म्यांमार – 40%

लाओस – 40%

दक्षिण अफ्रीका – 30%

कजाकिस्तान – 25%

मलेशिया – 25%

ट्यूनीशिया – 25%

इंडोनेशिया – 32%

बोस्निया एंड हर्जेगोविना – 30%

बांग्लादेश – 35%

सर्बिया – 35%

कंबोडिया – 36%

थाईलैंड – 36%

पहले यह टैरिफ 9 जुलाई से लागू होने वाले थे, लेकिन अब इस समयसीमा को बढ़ाकर 1 अगस्त कर दिया गया है।

भारत की स्थिति क्या है?

ट्रंप प्रशासन द्वारा अभी तक भारत पर टैरिफ को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। हालांकि, 2 अप्रैल को ट्रंप ने भारत पर 10% बेसलाइन टैरिफ के साथ कुल 26% टैरिफ लगाने की घोषणा की थी, लेकिन बाद में 90 दिनों की अंतरिम रोक लगा दी गई थी। यह 90 दिन की अवधि 9 जुलाई को समाप्त हो रही है। यानी अगले कुछ घंटों में स्पष्ट हो जाएगा कि भारत पर कौन सा नया टैरिफ लागू होगा या कोई समझौता हो जाएगा।

भारत से डील की बातचीत जारी

वीडियो में ट्रंप ने कहा, “हमने यूनाइटेड किंगडम और चीन के साथ डील की है, और अब भारत के साथ ट्रेड डील करने के करीब हैं।” हालांकि, यह डील किस तरह की है – क्या यह टैरिफ में रियायत से जुड़ी है, या व्यापक व्यापार समझौते से – इस पर कोई साफ विवरण नहीं दिया गया है।

ब्रिक्स देशों को भी चेतावनी

ट्रंप ने केवल इन 14 देशों तक ही अपनी सख्ती नहीं दिखाई, बल्कि ब्रिक्स देशों (ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) पर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कोई भी देश अमेरिका विरोधी नीति अपनाता है या अमेरिकी डॉलर के विकल्प की तरफ बढ़ता है, तो उस पर अतिरिक्त 10% टैरिफ लगाया जाएगा। उन्होंने यह भी दोहराया कि व्यापार पर 100% टैरिफ लगाने से भी वे पीछे नहीं हटेंगे।

क्या भारत को होगा फायदा या नुकसान?

अब बड़ा सवाल यह है कि भारत के साथ जो डील प्रस्तावित है, वह किस दिशा में जाएगी। अगर समझौता होता है, तो भारत को टैरिफ से राहत मिल सकती है और दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा मिल सकता है। लेकिन अगर बात नहीं बनी, तो भारत पर भी भारी टैरिफ लागू हो सकता है, जिससे भारत के निर्यातकों और उद्योग जगत पर सीधा असर पड़ेगा।

निष्कर्ष

अमेरिका और भारत के बीच इस डील की चर्चा आने वाले कुछ दिनों में वैश्विक व्यापार समीकरणों को प्रभावित कर सकती है। ट्रंप की आक्रामक टैरिफ नीति जहां एक ओर छोटे देशों पर दबाव बना रही है, वहीं भारत जैसे उभरते बाज़ारों के लिए यह अवसर और चुनौती – दोनों साबित हो सकता है। अब सबकी निगाहें 9 जुलाई और ट्रंप के अगले बयान पर टिकी हैं।

ट्रंप की टैरिफ नीति से भारत पर दबाव बढ़ गया है। अगर भारत के साथ डील नहीं होती, तो भारी टैरिफ लग सकता है, जिससे व्यापारिक रिश्तों में खटास आ सकती है। लेकिन अगर समझौता सफल होता है, तो यह दोनों देशों के लिए एक बड़ा रणनीतिक अवसर बन सकता है।

 

 

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