जासूस बना फ्रांस का डिप्लोमैट प्यार में

जासूस

अजब प्रेम की ग़ज़ब कहानी: जब फ्रांस का डिप्लोमैट प्यार में बना चीन का जासूस

यह कहानी किसी जासूसी उपन्यास या हॉलीवुड थ्रिलर जैसी लगती है, लेकिन यह पूरी तरह सच्ची है। इसमें प्रेम है, विश्वासघात है, जासूसी है और अंत में एक ऐसा खुलासा, जिसने दुनिया को हैरान कर दिया। यह कहानी है बर्नार्ड बोर्सिको (Bernard Boursicot) और शी पेईपू (Shi Pei Pu) की, जिसे दुनिया ने “चाइना लवर स्कैंडल” के नाम से जाना।

1963: गिरफ्तारी और कबूलनामा की शुरुआत

3 जून 1963, पेरिस की एक सड़क पर फ्रांसीसी डिप्लोमैट बर्नार्ड बोर्सिको अचानक खुफिया पुलिस (GSP) द्वारा गिरफ्तार कर लिए जाते हैं। शुरुआत में उन्हें लगता है कि उन्हें लूटा जा रहा है, लेकिन जल्द ही सच सामने आता है — यह कोई आम चोरी नहीं, बल्कि एक संगीन जासूसी का मामला है।

पुलिस पूछती है, “तुम्हारे घर में वह चीनी कौन है?” और यहीं से खुलती है वो परत-दर-परत कहानी, जिसमें प्यार की आड़ में देशद्रोह और धोखे की स्क्रिप्ट लिखी गई थी।

बीजिंग, 1964: प्यार की शुरुआत

फ्रांसीसी

20 वर्षीय बर्नार्ड की नियुक्ति चीन की राजधानी बीजिंग में फ्रांसीसी दूतावास में होती है। वहीं एक पार्टी में उनकी मुलाकात होती है एक रहस्यमयी चीनी व्यक्ति से, नाम शी पेईपू। वह खुद को ओपेरा सिंगर और लेखक बताता है। बर्नार्ड शी पेईपू की ओर खिंचता चला जाता है।

कुछ ही मुलाकातों के बाद शी पेईपू उसे बताता है कि वह एक औरत है जो परिवार के दबाव में पुरुष की तरह जी रही है। बर्नार्ड, जो खुद को हीरो समझने लगा था, इस “औरत” को उसकी असली पहचान दिलाने का फैसला करता है।

 

एक धोखा, जो एक मुल्क पर भारी पड़ा

1965 में शी पेईपू बताता है कि वह गर्भवती है। बर्नार्ड खुश होकर फ्रांस लौट जाता है, लेकिन 1969 में जब वह चीन वापस आता है तो वहां सांस्कृतिक क्रांति का आतंक फैला है। शी पेईपू अब तक एक बच्चे के साथ है, जो बर्नार्ड का बताया जाता है।

शी पेईपू के जरिए बर्नार्ड को चीन की सरकार संपर्क करती है। बर्नार्ड धीरे-धीरे चीन के लिए फ्रांस, अमेरिका और सोवियत संघ की गोपनीय जानकारियां लीक करने लगता है। यह सिलसिला वर्षों तक चलता है।

 

ट्रैजेडी या ट्रैप?

1970 के दशक में बर्नार्ड फ्रांस में दो और रिश्तों में भी था — एक मंगेतर कैथरीन और एक पुरुष प्रेमी थेरी। वह तीन जीवन जी रहा था: एक पति, एक प्रेमी और एक जासूस।

1983 में खुफिया एजेंसियों को बर्नार्ड की जासूसी की खबर लगती है और उसे गिरफ्तार कर लिया जाता है। पूछताछ में वह सब कुछ उगल देता है, मगर उसके विश्वास की नींव तभी टूटती है जब उसे बताया जाता है कि शी पेईपू असल में न कभी महिला था, न ही कभी गर्भवती हुआ था।

 

एक चौंकाने वाला सच

जांच में सामने आता है कि शी पेईपू ने अपने शरीर को इस तरह से प्रस्तुत किया था कि वह महिला लगे। सेक्स के समय उसने बर्नार्ड को यह यकीन दिला दिया कि वह महिला है। इतना ही नहीं, जिस बच्चे को उसका बेटा बताया गया, वह दरअसल चीन के दूरदराज प्रांत से खरीदा गया बच्चा था।

बर्नार्ड को जब कोर्ट में इसका सामना करना पड़ा, तो वह टूट गया। उसने आत्महत्या की कोशिश भी की।

 

अदालत का फैसला और उसके बाद की जिंदगी

जासूसी

1986 में अदालत ने बर्नार्ड और शी पेईपू दोनों को जासूसी का दोषी माना और 6 साल की सजा सुनाई। शी पेईपू को 1.5 साल में राजनीतिक दबाव में रिहा कर दिया गया, जबकि बर्नार्ड 4 साल जेल में रहा।

रिहा होने के बाद बर्नार्ड अपने पुरुष साथी थेरी के साथ रहने लगा, वहीं शी पेईपू और “बेटा” पैरिस में ही बस गए।

प्रेम, धोखा और पहचान की उलझी हुई कहानी

बर्नार्ड से जब वर्षों बाद पूछा गया कि क्या उसे शी पेईपू से नफरत है, तो उसने कहा:

“नहीं, मुझे बस अफसोस है कि हमारी कहानी वो नहीं थी जिस पर मैंने यकीन किया था।”

व्याख्या

यह सिर्फ एक प्रेम कहानी नहीं थी, यह एक देश की सुरक्षा को प्रभावित करने वाला जासूसी कांड था। यह दिखाता है कि इंसानी भावनाएं, जब भ्रम और छलावे में पड़ जाएं, तो वे कितनी बड़ी कीमत चुका सकती हैं।

यह कहानी आज भी दुनिया के सबसे विचित्र, चौंकाने वाले और दुखद प्रेम-प्रपंच-जासूसी घोटालों में से एक मानी जाती है।

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