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छत्तीसगढ़ राज्य में बदलाव की जरूरत।

छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़: भारत का सबसे उपेक्षित लेकिन संभावनाओं से भरा राज्य।

(छत्तीसगढ़/रायपुर)जब देश की राजनीति, विकास और मीडिया डिस्कोर्स की बात होती है, तो गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्यों का नाम सबसे पहले लिया जाता है। लेकिन इस लंबी चर्चा में एक राज्य हमेशा पीछे छूट जाता है — छत्तीसगढ़। साल 2000 में मध्यप्रदेश से अलग होकर एक स्वतंत्र राज्य बना छत्तीसगढ़, आज भी देश के सबसे उपेक्षित राज्यों में गिना जाता है।

शुरुआती उम्मीदें और मौजूदा हकीकत

छत्तीसगढ़ को अलग राज्य बनाने का मकसद था — ट्राइबल आबादी का विकास, प्रशासनिक सुविधा और आर्थिक तरक्की। यहां मिनरल्स, नेचुरल और ह्यूमन रिसोर्सेज भरपूर हैं। बावजूद इसके, राज्य की जीएसडीपी सिर्फ $64 बिलियन है और यहां की प्रति व्यक्ति आय ₹1.34 लाख ही है। रोजगार दर भले ही ठीक प्रतीत होती हो, लेकिन बड़ी आबादी आज भी खेती या माइनिंग जैसे प्राइमरी सेक्टर्स में फंसी हुई है।

बड़ा संकट: शराब की लत और नीतिगत विफलता

छत्तीसगढ़ देश में सबसे ज़्यादा शराब खपत वाले राज्यों में शामिल है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि यहां की 35.6% आबादी शराब का नियमित सेवन करती है। खास बात ये है कि गांव-गांव में शराब बेहद आसानी से उपलब्ध है। स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाली महुआ शराब और सरकारी दुकानों की भरमार ने मिलकर इस समस्या को जड़ से फैला दिया है।

राज्य सरकार भले ही नई शराब नीति लेकर आई हो, लेकिन लोकल लेवल पर अवैध शराब व्यापार, प्रशासनिक मिलीभगत और राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है।

नक्सलवाद: विकास की राह में सबसे बड़ा रोड़ा

छत्तीसगढ़ के दक्षिणी और आदिवासी बहुल जिलों में आज भी नक्सलवाद गहराई तक फैला है। बीजापुर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर और बस्तर जैसे जिले रेड कॉरिडोर में आते हैं। इन इलाकों में लिटरेसी रेट बेहद कम है और बच्चों के स्कूल ड्रॉप-आउट का प्रतिशत चौंकाने वाला है।

भूगोल, भाषा, और निरंतर हिंसा जैसे कारणों ने शिक्षा को कठिन बना दिया है। नतीजतन, यूथ को आसानी से नक्सली संगठनों द्वारा ब्रेनवॉश कर लिया जाता है।

इकोनॉमी की दिशा एकतरफा, डाइवर्सिफिकेशन की दरकार

हालांकि छत्तीसगढ़ में स्टील, कोल, आयरन ओर और टिन जैसे खनिजों की भरमार है, लेकिन राज्य की इकोनॉमी इनपर ही निर्भर है। लगभग 30% जीएसडीपी माइनिंग से आता है। लेकिन स्टार्टअप्स, सर्विस सेक्टर और टेक्नोलॉजी आधारित रोजगार में छत्तीसगढ़ पीछे है। 2024 के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में केवल 871 मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स हैं।

भ्रष्टाचार की चपेट में छत्तीसगढ़

बीते कुछ वर्षों में राज्य कई बड़े घोटालों से घिरा रहा है। 2000 करोड़ का शराब घोटाला, 1000 करोड़ का गौधन स्कैम, कोल स्कैम, पीडीएस स्कैम — ये सब सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। आमजन का विश्वास प्रशासन पर कम होता जा रहा है और पॉलिसी इम्प्लीमेंटेशन पर असर पड़ता है।

डिजिटल डिवाइड: 21वीं सदी में भी अधूरी पहुंच

छत्तीसगढ़ की 52% आबादी के पास ही टेलीकॉम सर्विस है। इंटरनेट तक पहुंच भी राष्ट्रीय औसत से काफी कम है। इससे राज्य की युवा पीढ़ी तकनीकी अवसरों से दूर रह जाती है।

क्या है समाधान?

इन समस्याओं के समाधान कठिन ज़रूर हैं, लेकिन असंभव नहीं। इसके लिए एक मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति, पारदर्शिता, और जमीनी स्तर पर काम करने की ज़रूरत है।

1. शराब पर नियंत्रण: अवैध शराब पर सख्त कार्रवाई, महुआ शराब के रेगुलेशन में सुधार, और ग्रामीण क्षेत्रों में शराब की दुकानों की संख्या कम की जाए।

2. नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा और रोजगार: स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर, स्थानीय भाषाओं में शिक्षा, और ट्राइबल यूथ के लिए स्किल डिवेलपमेंट को प्राथमिकता दी जाए।

3. इकोनॉमिक डाइवर्सिफिकेशन: स्टार्टअप्स को प्रमोट कर रोजगार के नए अवसर पैदा किए जाएं, और टेक्नोलॉजी सेक्टर में निवेश लाया जाए।

4. भ्रष्टाचार पर नकेल: लोकायुक्त और ऑडिट सिस्टम को मज़बूत किया जाए ताकि पारदर्शिता बढ़ सके।

5. डिजिटल पेनिट्रेशन: इंटरनेट और टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ बनाया जाए ताकि युवा तकनीक से जुड़ सकें।

छत्तीसगढ़ का भविष्य उसके युवाओं के हाथों में है

यह बात सच है कि छत्तीसगढ़ के बारे में चर्चा कम होती है, लेकिन ये भी उतना ही सच है कि इस राज्य में वह सबकुछ मौजूद है जो इसे देश का एक अग्रणी राज्य बना सकता है। आवश्यकता है, वहां के युवाओं के जागने की। जिस दिन वहां के लोग तय कर लेंगे कि वे बदलाव लाएंगे, उस दिन यह बदलाव निश्चित है।

अगर आप छत्तीसगढ़ से हैं, तो इस आर्टिकल को शेयर करें, इस पर चर्चा करें और अपने राज्य की आ

वाज़ को बुलंद करें। छत्तीसगढ़ बदल सकता है — जब आप बदलेंगे।

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