छत्तीसगढ़ में बिजली हुई महंगी: घरेलू से लेकर किसान और दुकानदारों तक सब पर असर, अगस्त से बढ़ा हुआ बिल मिलेगा
रायपुर। छत्तीसगढ़ विद्युत नियामक आयोग ने राज्य के करोड़ों उपभोक्ताओं को बड़ा झटका देते हुए बिजली की दरें बढ़ा दी हैं। घरेलू, कमर्शियल और कृषि—तीनों श्रेणियों के उपभोक्ताओं को अब प्रति यूनिट ज्यादा भुगतान करना होगा। इस बढ़े हुए टैरिफ का असर अगस्त 2025 से दिखाई देगा, जब लोगों को इनक्रीस किया हुआ बिजली बिल थमाया जाएगा।
घरेलू उपभोक्ताओं पर बोझ बढ़ा
घरेलू श्रेणी में 0 से 100 यूनिट तक बिजली इस्तेमाल करने वालों को अब प्रति यूनिट ₹4.10 देने होंगे, जो पहले ₹3.90 हुआ करते थे।
101 से 200 यूनिट तक पर दर ₹4.10 से बढ़ाकर ₹4.20 कर दी गई है।
201 से 400 यूनिट पर ₹5.50 की जगह अब ₹5.60 देने होंगे।
वहीं 401 से 600 यूनिट तक बिजली इस्तेमाल करने पर अब ₹6.60 प्रति यूनिट का भुगतान करना होगा, जो पहले ₹6.50 था।
(नाराज़गी या झटका दिखाता)
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(सरकारी सफाई या भविष्य दिखाता)
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कमर्शियल उपभोक्ताओं को भी नहीं बख्शा गया
दुकानदारों और व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को अब पहले से अधिक दरों पर बिजली मिलेगी।
0 से 100 यूनिट पर पहले ₹6.05 देने पड़ते थे, जो अब बढ़ाकर ₹6.30 कर दिए गए हैं।
101 से 400 यूनिट तक उपभोग करने पर ₹7.05 की जगह अब ₹7.30 प्रति यूनिट देना होगा।
किसानों को भी झटका
कृषि आधारित कनेक्शन, जैसे सिंचाई पंप आदि के लिए भी दरें बढ़ाई गई हैं। पहले ₹6.25 प्रति यूनिट का भुगतान होता था, अब इसे बढ़ाकर ₹6.55 कर दिया गया है।
बिजली कंपनियों ने घाटे को बताया वजह
छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी (CSPDCL) और नियामक आयोग ने इस बढ़ोतरी का कारण कंपनी को हो रहे ₹4550 करोड़ के घाटे को बताया है।
अधिकारियों के अनुसार लाइन लॉस और बिजली चोरी की वजह से भारी नुकसान हो रहा है, जिसे रेट बढ़ाकर वसूला जाना जरूरी हो गया था।
राजनीतिक प्रतिक्रिया भी आई सामने
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “छत्तीसगढ़ सरकार ने जनता को झटका दिया है।”
उन्होंने यह भी कहा कि यह फैसला जनविरोधी है और इसका सबसे बड़ा असर किसानों और मध्यमवर्गीय परिवारों पर पड़ेगा।
वशिष्ठ खां मिश्रा की गैरमौजूदगी चर्चा में
हर बार नियामक आयोग की दरवृद्धि पर आपत्ति दर्ज कराने वाले वरिष्ठ पार्षद वशिष्ठ खां मिश्रा इस बार स्वास्थ्य कारणों से अनुपस्थित हैं। लोगों का मानना है कि अगर वह होते, तो इस बार भी तर्कसंगत आपत्ति जरूर रखते।
अब सवाल यह है कि क्या जनता इस बढ़े हुए बोझ को सहने के लिए तैयार है?
आपके विचार क्या हैं? नीचे कमेंट करके जरूर बताएं।