Site icon TAJAKHABAR

छत्तीसगढ़ में पश्चिम बंगाल के 9 मजदूरों को बांग्लादेशी

छत्तीसगढ़ में पश्चिम बंगाल के 9 मजदूरों को बांग्लादेशी बताकर जेल भेजा, महुआ मोइत्रा ने बताया “राज्य प्रायोजित अपहरण”

कोंडागांव (छत्तीसगढ़)/कोलकाता: छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है जहां पश्चिम बंगाल के 9 मजदूरों को बांग्लादेशी नागरिक बताकर पुलिस ने हिरासत में लेकर जेल भेज दिया। यह मामला उस वक्त तूल पकड़ गया जब कृष्णा नगर से तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा ने इसे “राज्य प्रायोजित अपहरण” करार देते हुए छत्तीसगढ़ सरकार पर तीखा हमला बोला।

महुआ मोइत्रा का आरोप: वैध दस्तावेज के बावजूद हिरासत

सांसद महुआ मोइत्रा ने आरोप लगाया कि उनके संसदीय क्षेत्र से संबंध रखने वाले 9 मजदूर छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले के अलबेला पारा में एक निजी स्कूल में निर्माण कार्य कर रहे थे। लेकिन 12 जुलाई को पुलिस ने इन्हें बिना किसी गिरफ्तारी आदेश या कानूनी प्रक्रिया के हिरासत में लिया और जगदलपुर जेल भेज दिया।

महुआ मोइत्रा ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा:

> “नौ लोगों का राज्य प्रायोजित अपहरण। बिना किसी गिरफ्तारी आदेश के, बिना किसी सुनवाई और बिना किसी वकील के, अवैध रूप से बीएनएसएस की धारा 128 के तहत गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। बंदियों से कोई संपर्क नहीं।”

वीडियो बयान में मोइत्रा ने क्या कहा?

महुआ मोइत्रा ने एक वीडियो संदेश में कहा:

> “This is a case of state-sponsored kidnapping by the Chhattisgarh Police. All nine workers had valid documents. Their phones have been switched off. There has been no information about them since then.”

छत्तीसगढ़ पुलिस की सफाई

कोंडागांव के पुलिस अधीक्षक अक्षय कुमार ने इस पूरे मामले में सफाई देते हुए कहा कि कार्रवाई छत्तीसगढ़ में अवैध रूप से रह रहे संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों पर चल रही STF जांच के तहत की गई थी।

एसपी अक्षय कुमार ने बताया:

> “बीएनएसएस की धारा 128 के तहत इन मजदूरों पर कार्रवाई की गई थी। संदेह के आधार पर 12 जुलाई को इन्हें हिरासत में लिया गया था। बाद में गृह राज्य की पुलिस और प्रशासन से जानकारी प्राप्त होने के बाद 14 जुलाई को मजिस्ट्रेट द्वारा इन्हें रिहा करने का आदेश दिया गया।”

क्या है बीएनएसएस धारा 128?

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 128 के तहत किसी व्यक्ति द्वारा अपनी पहचान या उपस्थिति की जानकारी छुपाने पर कार्रवाई की जाती है।

बस्तर के सांसद का जवाब: “बस्तर को बर्बाद नहीं होने देंगे”

इस पूरे विवाद पर बस्तर से भाजपा सांसद महेश कश्यप ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने महुआ मोइत्रा पर पलटवार करते हुए कहा:

> “महुआ मोइत्रा को बस्तर के मामलों में बोलने का कोई अधिकार नहीं है। बस्तर पांचवीं अनुसूची क्षेत्र है और वहां विशेष कानून लागू हैं। बंगाल को बर्बाद करने वाली TMC को बस्तर की चिंता करने की ज़रूरत नहीं है। कानून के तहत जो भी कार्रवाई होगी, वही होगी।”

कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका, लेकिन रिहाई का दावा

इस घटना को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका भी दाखिल की गई। इसके बाद पुलिस की ओर से दावा किया गया कि मजदूरों को सोमवार शाम रिहा कर दिया गया है, हालांकि महुआ मोइत्रा का कहना है कि अभी तक उनके परिवारों से किसी भी तरह का संपर्क नहीं हो पाया है।

निष्कर्ष

यह मामला केंद्र और राज्य सरकारों के बीच एक संवेदनशील राजनीतिक बहस का रूप लेता जा रहा है। एक ओर जहां तृणमूल कांग्रेस इसे संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन बता रही है, वहीं छत्तीसगढ़ पुलिस इसे सुरक्षा कारणों से की गई आवश्यक कार्रवाई कह रही है। हालांकि, यह स्पष्ट है कि देश के किसी भी नागरिक को केवल शक के आधार पर गिरफ्तार करना और फिर बिना पारदर्शिता के रिहाई का दावा करना, गंभीर सवाल खड़े करता है।

Exit mobile version