ओडिशा: यौन शोषण का आरोप लगाने वाली छात्रा की आत्महत्या मामला तूल पकड़ा, आरोपी प्रोफेसर और प्रिंसिपल गिरफ्तार
पटीर मोहन कॉलेज में छात्र राजनीति और प्रबंधन की भूमिका पर उठे सवाल
ओडिशा के पटीर मोहन कॉलेज में यौन शोषण का आरोप लगाने वाली छात्रा की आत्महत्या का मामला अब राज्यभर में तूल पकड़ता जा रहा है। इस मामले में लगातार नए खुलासे हो रहे हैं, जो कॉलेज प्रबंधन और छात्र राजनीति की संवेदनहीनता और मिलीभगत की ओर इशारा करते हैं।
छात्रों के पत्र से खुलासा, आरोपी प्रोफेसर के संरक्षण का आरोप
कॉलेज के छात्रों का एक पत्र सामने आया है, जो 1 जुलाई को लिखा गया था। इस पत्र में 71 छात्रों के हस्ताक्षर हैं, और इसमें पीड़िता को कॉलेज से निलंबित करने की मांग की गई थी। आरोप है कि यह पूरा पत्र प्रोफेसर समीर रंजन साहू के इशारे पर तैयार कराया गया था।
पत्र में तीन प्रमुख मांगें की गई थीं:
1. पीड़िता द्वारा लगाए गए यौन शोषण के आरोपों को झूठा बताया गया और उसे कॉलेज से निलंबित करने की मांग की गई।
2. पीड़िता के समर्थन में खड़े छात्रों को भी सस्पेंड किया जाए।
3. जब तक जांच पूरी न हो, कॉलेज में छात्र यूनियन की सभी गतिविधियों पर बैन लगाया जाए।
इससे यह साफ होता है कि प्रोफेसर समीर रंजन साहू को बचाने के लिए संगठित प्रयास चल रहा था और छात्र समुदाय को भी इसमें उपयोग किया गया।
छात्रा पर दबाव, छात्र राजनीति का जहरीला माहौल
पीड़िता के एक करीबी दोस्त ने बताया कि यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराने के बाद छात्रा पर लगातार दबाव डाला जा रहा था। इस पूरे मामले में कॉलेज की छात्र यूनियन, जिसमें एनएसयूआई और बीजू जनता दल के छात्र संगठन शामिल हैं, की भूमिका पर सवाल उठे हैं। बताया जा रहा है कि सोशल मीडिया पर भी छात्रा को बदनाम करने और चुप कराने का अभियान चलाया गया था।
12 जुलाई को छात्रा ने आत्महत्या की कोशिश की, जिसमें उसका लगभग 95% शरीर जल गया था। उसे इलाज के लिए एम्स भुवनेश्वर में भर्ती कराया गया, जहां 15 जुलाई को उसकी मौत हो गई।
प्रशासन की लापरवाही और परिवार के आरोप
पीड़िता ने कॉलेज प्रशासन के सामने प्रोफेसर समीर रंजन साहू के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन कॉलेज ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। इतना ही नहीं, पीड़िता के परिवार का आरोप है कि कॉलेज के प्रिंसिपल ने छात्रा पर दबाव बनाया कि वह अपनी शिकायत वापस ले और माफ़ी मांगे।
पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर में यह बात भी सामने आई है कि प्रिंसिपल ने परिवार को धमकाया था कि अगर उन्होंने शिकायत वापस नहीं ली तो छात्रा आत्महत्या करने पर मजबूर हो सकती है।
गिरफ्तारी और जनआक्रोश
छात्रा की मौत के बाद राज्यभर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। जनदबाव के चलते अंततः प्रोफेसर समीर रंजन साहू और कॉलेज के प्रिंसिपल को गिरफ्तार कर लिया गया।
यह मामला केवल एक छात्रा की मौत नहीं है, बल्कि एक सिस्टम की विफलता और नैतिक पतन का प्रतीक है। अब यह देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी पारदर्शी और कठोर कार्रवाई करता है। हम इस मामले से जुड़ी हर अपडेट आप तक पहुंचाते रहेंगे।