चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी पर ईडी की प्रेस रिलीज जारी: ₹1000 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग में बड़ा खुलासा, तीन और गिरफ्तार
मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जिस प्रेस रिलीज का बेसब्री से इंतजार था, वह आज प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने औपचारिक तौर पर जारी कर दी है। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल को 18 जुलाई 2025 को ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया था। अब ईडी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर चैतन्य पर लगे आरोपों की पूरी जानकारी सार्वजनिक की है, जिससे प्रदेश की राजनीति और भी गरमा गई है।
ईडी की प्रेस विज्ञप्ति में क्या है?
ईडी की कार्रवाई राज्य की एसीबी-ईओडब्ल्यू (EOW) द्वारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 और आईपीसी की धाराओं के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर की गई। जांच में यह सामने आया है कि 2019 से 2022 के बीच हुए शराब घोटाले से राज्य सरकार को भारी वित्तीय नुकसान पहुंचा और करीब ₹2500 करोड़ की अवैध कमाई की गई।
ईडी के अनुसार, चैतन्य बघेल ने इस घोटाले से प्राप्त ₹16.70 करोड़ की अवैध कमाई को अपने रियल एस्टेट प्रोजेक्ट में खपाया। उन्होंने नगद में ठेकेदारों को भुगतान किया, फर्जी बैंक एंट्री करवाई और फ्लैट खरीदने के नाम पर पैसे का उपयोग किया।
विट्ठलपुरम प्रोजेक्ट और त्रिलोक सिंह ढिल्लन
ईडी ने बताया कि चैतन्य बघेल ने त्रिलोक सिंह ढिल्लन (भिलाई स्थित होटल व्यवसायी) के साथ मिलकर ‘विट्ठलपुरम परियोजना’ में फर्जी फ्लैट खरीदने की योजना बनाई और ₹5 करोड़ की धनराशि हासिल की। इन फ्लैटों को ढिल्लन के कर्मचारियों के नाम पर खरीदा गया, जबकि असली लाभार्थी खुद चैतन्य बघेल थे।
₹1000 करोड़ से अधिक की मनी हैंडलिंग का आरोप
ईडी की सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि चैतन्य बघेल ने कथित रूप से इस घोटाले से जुड़े ₹1000 करोड़ से अधिक की अवैध धनराशि को “हैंडल” किया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि यह धनराशि अनवर ढेबर के माध्यम से कांग्रेस के तत्कालीन कोषाध्यक्ष तक पहुंचाई गई।
अब तक किन-किन की हो चुकी है गिरफ्तारी?
अब तक इस मामले में जिन प्रमुख व्यक्तियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, उनमें शामिल हैं:
अनिल टूटेजा (पूर्व IAS अधिकारी)
अरविंद सिंह (भिलाई निवासी)
त्रिलोक चंद ढिल्लन (भिलाई के होटल व्यवसायी)
अनवर ढेबर (पूर्व मेयर एजाज ढेबर के भाई)
अरुण पत्ती (भाजपा और कांग्रेस सरकारों में प्रभावशाली अधिकारी)
कवासी लखमा (पूर्व आबकारी मंत्री और वर्तमान कोंटा विधायक)
ईडी का कहना है कि यह घोटाला केवल शराब की बिक्री तक सीमित नहीं था, बल्कि इस धन का उपयोग राजनीतिक व व्यक्तिगत निवेश में किया गया। मामले की गहन जांच जारी है और आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
ईओडब्ल्यू की कार्रवाई: तीन और गिरफ्तार
ईडी के साथ-साथ राज्य की ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा) भी सक्रिय है। आज ईओडब्ल्यू ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है:
1. संजय कुमार मिश्रा – पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट
2. मनीष मिश्रा – संजय के बड़े भाई
3. अभिषेक सिंह – आबकारी घोटाले के आरोपी अरविंद सिंह का भतीजा
इन तीनों पर आरोप है कि इन्होंने ‘नेक्स्ट जेन पावर कंपनी’ के नाम पर एफएल-10 लाइसेंस लिया और राज्य में महंगी ब्रांडेड अंग्रेजी शराब सप्लाई की। इसके साथ ही घोटाले से प्राप्त अवैध धन को वैध दिखाने का प्रयास किया।
सियासी हलचल तेज
चैतन्य बघेल से मुलाकात के लिए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अपने पूरे परिवार के साथ जेल पहुंचे। उन्होंने बेटे से मिलकर कहा, “आज अगर तुम्हारे दादा नंदकुमार बघेल जिंदा होते, तो वे खुश होते।” नंदकुमार बघेल को खुले विचारों और जन संघर्षों के लिए जाना जाता था।
दिल्ली में मीडिया से बातचीत करते हुए भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर तंज कसते हुए कहा, “मेरा बेटा अब उनका दुश्मन बन गया है।”
कांग्रेस की तैयारी: आर्थिक नाकेबंदी
22 जुलाई को कांग्रेस द्वारा राज्यभर में आर्थिक नाकेबंदी की घोषणा की गई है। हालांकि इस पर राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने तीखा बयान देते हुए कहा, “चैतन्य बघेल तो कांग्रेस का पदाधिकारी भी नहीं था, फिर कांग्रेस किसके लिए आंदोलन कर रही है?”
निष्कर्ष
ईडी की प्रेस रिलीज ने चैतन्य बघेल और पूरे शराब घोटाले से जुड़े मामले में बड़ा खुलासा किया है। ₹1000 करोड़ की धनराशि के हेरफेर का आरोप न सिर्फ चैतन्य, बल्कि पूरे बघेल परिवार की मुश्किलें बढ़ा सकता है। कांग्रेस जहां इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता रही है, वहीं भाजपा इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा कदम बता रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा छत्तीसगढ़ की राजनीति में और हलचल मचाएगा।