स्मृति टीवी से राजनीति तक का उनका सफर चर्चा में रहा है, और वे देश की सबसे युवा केंद्रीय मंत्री बनकर कई बड़े मंत्रालयों का दायित्व निभा चुकी हैं।
स्मृति ईरानी ने 2011 में पहली बार गुजरात से राज्यसभा में कदम रखा। 2014 के आम चुनाव में उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ अमेठी से चुनाव लड़ा, हालांकि वे हार गईं। लेकिन 2019 लोकसभा चुनाव में वे राहुल गांधी को हराकर अमेठी से सांसद बनीं, जो भारतीय राजनीति का बड़ा पल था।
2014 में एनडीए सरकार में उन्हें मानव संसाधन विकास मंत्री बनाया गया, जहां उनके काम की काफी चर्चा रही। 2016 में उन्हें कपड़ा मंत्रालय और 2017 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय मिला। 2019 में उन्हें महिला एवं बाल विकास मंत्री और बाद में अल्पसंख्यक मामलों का मंत्रालय सौंपा गया। इन मंत्रालयों में रहते हुए उन्होंने शिक्षा नीतियों, महिला सुरक्षा और पोषण सुधार जैसे कई महत्वपूर्ण कार्य किए।
हालिया चुनाव और नया अध्याय
2024 के लोकसभा चुनाव में स्मृति ईरानी अमेठी सीट से कांग्रेस के किशोरीलाल शर्मा से हार गईं। चुनाव हारने के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति से कुछ दूरी बनाई है और फिर से टीवी सीरियल ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2’ में अभिनय करती नज़र आ रही हैं। हालांकि, वे अपने राजनीतिक करियर को खत्म नही मानती और इंटरव्यू में कह चुकी हैं कि 49 की उम्र रिटायर होने की नहीं है।
योगदान और पहचान
वे देश की सबसे युवा केंद्रीय मंत्री बनीं।
एमएचआरडी मंत्री रहते हुए शिक्षा में कई नवाचार किए और नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति की नींव रखी।
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय में POSHAN Tracker जैसे डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म की शुरुआत की, जिससे करोड़ों महिलाओं और बच्चों को फायदा हुआ।
कोविड काल में टेक्सटाइल क्षेत्र को नया जीवन दिया और PPE किट्स के विनिर्माण में भारत को विश्वभर में अग्रणी बना डाला।
स्मृति ईरानी का बड़ा हिस्सा सुर्खियां बटोरने वाली राजनीतिक और सामाजिक बहसों में भी रहता है। वे युवाओं, महिला सशक्तीकरण और डिजिटल भारत के मामलों में सक्रिय रहीं।
राजनीति और समाज में उनका योगदान आने वाले समय में भी चर्चा का विषय बना रहेगा।