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राजस्थान के दो केमिस्ट्री टीचर्स ने बनाई ₹15 करोड़ की ड्रग फैक्ट्री

राजस्थान के दो केमिस्ट्री टीचर्स

ब्रेकिंग बैड से भी खतरनाक! राजस्थान के दो केमिस्ट्री टीचर्स ने बनाई ₹15 करोड़ की ड्रग फैक्ट्री—श्रीगंगानगर में घर में ही बनाई सिंथेटिक ड्रग लैब, एनसीबी ने दबोचा

श्रीगंगानगर, राजस्थान: एक बार फिर रियल लाइफ ने फिल्मी दुनिया को पीछे छोड़ दिया। ब्रेकिंग बैड में आपने देखा होगा कि एक केमिस्ट्री प्रोफेसर अपने ज्ञान का इस्तेमाल करके ड्रग्स बनाना शुरू कर देता है, लेकिन जो कहानी राजस्थान से सामने आई है, वह हकीकत में न सिर्फ चौंकाने वाली है, बल्कि डरावनी भी है।

यह कहानी है दो केमिस्ट्री टीचर्स की—मनोज भार्गव (55) और इंद्रजीत (25)—जो बच्चों को विज्ञान पढ़ाने के साथ-साथ एक खतरनाक नशे की दवा मेफेड्रोन (MD) बनाकर काले बाज़ार में बेच रहे थे। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने इन दोनों को श्रीगंगानगर के रिद्धि-सिद्धि एन्क्लेव के एक फ्लैट से गिरफ्तार किया है, जहाँ ये एक गुप्त लैब चलाते थे।

दो महीने में ₹15 करोड़ की कमाई, ₹10,000 किराए के फ्लैट में चल रही थी फैक्ट्री

NCB की रिपोर्ट के अनुसार, ये दोनों आरोपी करीब दो महीने से राजस्थान के श्रीगंगानगर के फ्लैट में रह रहे थे और केवल ₹10,000 महीने का किराया दे रहे थे। इतने कम साधनों में इन्होंने एक पूरी सिंथेटिक ड्रग लैब खड़ी कर दी थी, जहां से उन्होंने करीब 5 किलो मेफेड्रोन तैयार करके बेच दी। इसकी बाजार कीमत ₹15 करोड़ से अधिक आंकी गई है।

केमिकल्स और उपकरण किसी प्रोफेशनल लैब से कम नहीं

NCB की रेड में फ्लैट से 780 ग्राम मेफेड्रोन के अलावा कई संवेदनशील रसायन और उपकरण जब्त किए गए, जैसे:

एसीटोन

बेंजीन

मिथाइलमाइन

ब्रोमीन

सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट

आइसोप्रोपिल अल्कोहल

एन-मिथाइल टू पायरोलिडोन

ये सारे रसायन एक उन्नत लैब में ही इस्तेमाल होते हैं, जिससे यह साफ हो गया कि आरोपी इस कार्य को पूरी सुनियोजित योजना के तहत अंजाम दे रहे थे।

दोस्ती से शुरू हुआ ‘ड्रग सिंडिकेट’

मनोज और इंद्रजीत की पिछले 15 सालों से दोस्ती है। दोनों पर लाखों रुपये का कर्ज था। इसी दबाव में आकर उन्होंने ड्रग बनाने का रास्ता चुना। उनका कच्चा माल दिल्ली से आता था और ड्रग्स को एक मिडल मैन के जरिये बाजार में बेचा जाता था। पुलिस अब उस मिडल मैन और पूरे नेटवर्क की तलाश में जुटी है।

एनसीबी को कैसे लगी भनक?

हाल ही में NCB ने देशभर की पुलिस को एक अलर्ट जारी किया था जिसमें ऐसे अपार्टमेंट्स की पहचान करने की बात कही गई थी जिनकी खिड़कियों पर काले पर्दे, रासायनिक गंध, ऊँचा बिजली बिल, या आंखों में जलन जैसी शिकायतें हो रही हों। श्रीगंगानगर की यह लैब उन्हीं संकेतों में फिट बैठी, जिसके बाद टीम ने 8 जुलाई की सुबह छापा मारा।

मेफेड्रोन: नशे की दुनिया का खतरनाक चेहरा

मेफेड्रोन कोई आम नशा नहीं है। यह एक सिंथेटिक ड्रग है जो दिमाग को उत्तेजित करता है, जिससे इंसान आक्रामक हो सकता है और खुद पर नियंत्रण खो सकता है। इसे मुख्यतः क्लब, पार्टी और अंडरग्राउंड ड्रग मार्केट में इस्तेमाल किया जाता है। इसकी एक खुराक की कीमत हजारों रुपये होती है।

बड़ा सवाल: कितने लोगों तक पहुँच चुका था ये ज़हर?

NCB अब इस बात की गहन जांच कर रही है कि:

क्या इनकी सप्लाई दिल्ली, पंजाब, हरियाणा या अन्य राज्यों तक पहुंची थी?

क्या इनके पीछे कोई अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट काम कर रहा था?

कितनी मात्रा में अब तक ये ड्रग्स बेची जा चुकी है?

और, इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं?

कानून सख्त, सजा बेहद भारी

भारत में मेफेड्रोन को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस एक्ट के तहत प्रतिबंधित किया गया है। इसके तहत 10 साल तक की जेल और लाखों रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है।

निष्कर्ष: शिक्षा के मंदिर से जहरीली फैक्ट्री तक

ये घटना एक कड़वी सच्चाई को उजागर करती है कि समाज का सबसे शिक्षित वर्ग भी अगर गलत दिशा में चला जाए, तो उसका प्रभाव कितनी बड़ी तबाही ला सकता है। दो टीचर जो बच्चों को भविष्य सिखाने वाले थे, खुद भविष्य को नशे में धकेलने का साधन बन गए। एनसीबी की तेजी से कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन अब जरूरत है ऐसी सोच को जड़ से खत्म करने की

 

फिलहाल, जांच जारी है और पुलिस पूरे नेटवर्क को बेनकाब करने की कोशिश में जुटी है।

 

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