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मुंबई सीरियल ब्लास्ट केस में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

मुंबई सीरियल ब्लास्ट केस में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: 19 साल बाद सभी आरोपी बरी, 180 मौतों का गुनहगार कौन?

2006 के मुंबई लोकल ट्रेन सीरियल बम धमाकों में बॉम्बे हाईकोर्ट ने चौंकाने वाला फैसला सुनाते हुए सभी 12 आरोपियों को बरी कर दिया है। इनमें से एक आरोपी की पहले ही मौत हो चुकी है। यह फैसला उन 180 मासूमों की मौत और 800 से अधिक घायल नागरिकों के साथ हुए अन्याय के सवाल खड़े करता है।

🔴 क्या था मामला?

11 जुलाई 2006 को शाम 6:24 से लेकर 6:35 के बीच 7 अलग-अलग लोकल ट्रेनों में प्रेशर कुकर बम ब्लास्ट हुए थे। विस्फोट चर्चगेट से लेकर विरार तक की ट्रेनों में क्रमशः माहिम, बांद्रा, खार, जोगेश्वरी, बोरीवली, मीरा रोड और माटुंगा में हुए थे। इस ब्लास्ट ने पूरे देश को झकझोर दिया था।

 

🔍 जांच और गिरफ्तारी का सिलसिला

महाराष्ट्र ATS ने घटना के बाद 13 लोगों को गिरफ्तार किया।

इन पर मकोका, UAPA जैसे सख्त आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत मुकदमे दर्ज हुए।

 

2015 में स्पेशल मकोका कोर्ट ने 12 आरोपियों को दोषी करार दिया था।

5 को फांस

7 को उम्रकैद

1 आरोपी को बरी किया गया था।

 

फैसले के खिलाफ सभी दोषियों ने बॉम्बे हाईकोर्ट में अपील दायर की थी।

⚖️ हाईकोर्ट का फैसला और तर्क

2025 के जनवरी में सुनवाई पूरी हुई और जुलाई में बॉम्बे हाईकोर्ट की दो जजों की विशेष बेंच – जस्टिस अनिल किलोकर और जस्टिस श्याम चंदर – ने अपना फैसला सुनाया।

 

कोर्ट ने कहा कि:

> “पुलिस के पास आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त और ठोस सबूत नहीं हैं।”

“जिन आरोपियों के खिलाफ पहले कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड नहीं था, उन्हें तुरंत रिहा किया जाए।”

“कन्फेशन पर आधारित सज़ा टिकाऊ नहीं है अगर स्वतंत्र सबूतों से उसका समर्थन नहीं हो।”

 

🕵️‍♂️ मुंबई पुलिस की जांच पर सवाल

कोर्ट ने सीधे तौर पर कहा कि इन्वेस्टिगेशन में गंभीर खामियां थीं।

अभियोजन पक्ष (प्रॉसिक्यूशन) आतंकियों को “मास्टरमाइंड” साबित नहीं कर पाया।

लोअर कोर्ट द्वारा स्वीकार किए गए सबूतों को हाईकोर्ट ने अपर्याप्त और संदिग्ध माना।

 

👥 बरी किए गए आरोपी कौन हैं?

इन 12 आरोपियों में शामिल थे:

कमल अहमद अंसारी, तनवीर अहमद अंसारी, मोहम्मद फैजल शेख, एहतशाम सिद्दीकी, मोहम्मद माजिद शफी, शेख आलम, मोहम्मद सादिक अंसारी, मुजम्मिल शेख, सोहेल शेख, जाहिद अहमद शेख, नबीर जोसेफ खान और आसिफ खान।

❓ अब सवाल उठता है – दोषी कौन था?

जब सारे आरोपी बरी हो गए, तो 180 लोगों की मौत का गुनहगार कौन है?

2006 में कहा गया था कि लश्कर-ए-तैयबा और पाकिस्तान के आतंकी आज़म चीमा के इशारे पर ब्लास्ट कराए गए।

बताया गया था कि पाकिस्तान के भावलपुर स्थित ट्रेनिंग कैंप से 50 युवकों को भारत भेजा गया था।

 

ATS ने दावा किया था कि आरोपियों ने इकबालिया बयान दिया था।

लेकिन कोर्ट ने कहा – ये बयान जबरन लिए गए हो सकते हैं और इनका समर्थन स्वतंत्र सबूतों से नहीं हुआ।

 

📌 क्या पुलिस सुप्रीम कोर्ट जाएगी?

कानूनी जानकारों के अनुसार, मुंबई पुलिस और सरकार के पास अब सिर्फ एक ही विकल्प है – सुप्रीम कोर्ट में अपील।

यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सुप्रीम कोर्ट लोअर कोर्ट के फैसले को बहाल करता है या हाईकोर्ट के निर्णय को सही ठहराता है।

 

📣 न्याय किसे मिला?

12 आरोपी बरी हुए, यानी अदालत ने उन्हें बेगुनाह माना।

लेकिन 180 परिवार आज भी न्याय के इंतज़ार में हैं।

क्या अब यह केस फिर से खोला जाएगा? क्या दोषियों की तलाश नए सिरे से होगी?

यह सिर्फ मुंबई का मामला नहीं, यह पूरे देश की न्याय व्यवस्था और जांच एजेंसियों की साख का सवाल है।

मुंबई सीरियल ब्लास्ट केस में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: 12 आरोपी बरी, 180 मौतों का गुनहगार अब भी लापता!

 

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