बीजापुर में माओवादियों की फिर वापसी? IED ब्लास्ट में दो जवान घायल, एक इनामी नक्सली ढेर
(बीजापुर, छत्तीसगढ़ ) बीजापुर जिले में एक बार फिर माओवादी गतिविधियों में अचानक तेजी देखने को मिल रही है। हालिया घटनाएं इस ओर संकेत दे रही हैं कि बैकफुट पर गई माओवादी ताकतें फिर से सक्रियता दिखाने की कोशिश कर रही हैं। एक ओर जहां सरकार और सुरक्षाबल यह दावा कर रहे हैं कि माओवादियों का नेटवर्क कमज़ोर हो चुका है, वहीं दूसरी ओर माओवादियों की ओर से शांति वार्ता की अपील और साथ ही हिंसा की घटनाएं, दोनों ही परस्पर विरोधाभासी स्थिति को जन्म दे रही हैं।
IED ब्लास्ट में दो जवान घायल
बीजापुर जिले के थाना आवापल्ली क्षेत्र के अंतर्गत तिमापुर–मुर्दुंडा मार्ग पर माओवादियों द्वारा पहले से लगाए गए IED (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) विस्फोट में सीआरपीएफ की 229वीं बटालियन के दो जवान घायल हो गए। ये जवान आरओपी (Road Opening Party) ड्यूटी के तहत निकले थे। पुलिस द्वारा जारी प्रेस नोट के अनुसार, घायलों को तत्काल प्राथमिक उपचार के बाद रायपुर रेफर कर दिया गया है।
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब माओवादी संगठन खुद को कमजोर स्थिति में दिखा रहा था। बावजूद इसके, इस प्रकार का हमला यह संकेत देता है कि वे अब भी चुनौती देने की क्षमता रखते हैं।
इंद्रावती टाइगर रिजर्व में मुठभेड़, ₹8 लाख के इनामी नक्सली की मौत
इसी दिन एक और बड़ी खबर सामने आई। इंद्रावती टाइगर रिजर्व के इलाके में सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच मुठभेड़ हुई, जिसमें एक इनामी नक्सली सोडी कन्ना मारा गया। पुलिस के मुताबिक, सोडी कन्ना पीएलजीए बटालियन नंबर-1 की कंपनी नंबर-2 का डिप्टी कमांडर था और उस पर ₹8 लाख का इनाम घोषित था।
मुठभेड़ के बाद मौके से 303 राइफल, भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री, AK-47 की मैगज़ीन, 59 जिंदा कारतूस, रेडियो, वर्दी, डेटोनेटर, और अन्य सामान जब्त किए गए। हालांकि, एक बड़ा सवाल यह उठता है कि एक प्रशिक्षित स्नाइपर कमांडर के पास मात्र 303 जैसी पुरानी राइफल क्यों बरामद हुई?
पिछले 18 महीनों में 415 माओवादी ढेर
पुलिस द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024-25 में अब तक कुल 415 हार्डकोर माओवादी मारे जा चुके हैं। यह संख्या सुरक्षा बलों की रणनीतिक सफलता और जन समर्थन की मिसाल बताई जा रही है। सुरक्षा बलों की टीमों में डीआरजी, एसटीएफ, कोबरा, सीआरपीएफ, बीएसएफ और बस्तर फाइटर शामिल हैं, जिन्होंने कठिन भौगोलिक और मौसमीय स्थितियों में भी ऑपरेशनों को अंजाम दिया।
क्या माओवादी फिर से उभार पर हैं?
बीते कुछ महीनों में 6 ग्रामीणों की हत्या और लगातार IED ब्लास्ट, बी जी एल दागे जाने जैसी घटनाएं इस ओर इशारा करती हैं कि माओवादी अपनी मौजूदगी जताना चाहते हैं। हालांकि वे शांति वार्ता के पक्ष में पत्र भी जारी कर चुके हैं, लेकिन गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में स्पष्ट किया था कि “जब तक हथियार नहीं छोड़ते, कोई वार्ता नहीं होगी।”
इस बयान के बाद से माओवादियों ने शांति वार्ता के सुर धीमे कर दिए और हिंसक गतिविधियों की तरफ लौटते दिख रहे हैं।
स्थानीयों में भय और सरकार की जिम्मेदारी
मुखबिरी के शक में ग्रामीणों की हत्याएं माओवादियों की एक पुरानी रणनीति रही है, जो अब फिर से सामने आ रही है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि सरकार और सुरक्षाबल ग्रामीणों के बीच सुरक्षा का भरोसा किस तरह बहाल करेंगे?
सवाल यह भी है कि अगर माओवादी कमजोर हैं, तो अब भी वे इस तरह के हमलों को अंजाम कैसे दे पा रहे हैं? क्या यह संकेत है कि वे फिर से regroup कर रहे हैं? और क्या आने वाले समय में ऐसी और घटनाएं देखने को मिलेंगी?
इन सवालों का जवाब समय के साथ सामने आएगा। मगर फिलहाल, बीजापुर और आसपास के इलाकों में तनाव और सतर्कता दोनों ही चरम पर हैं।