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छात्र पढ़ाई से वंचित आखिर कब मिलेंगी किताबें

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“कब मिलेंगी किताबें?” – एक महीने बाद भी स्कूलों में पुस्तक वितरण अधूरा, छात्र पढ़ाई से वंचित

छात्र पढ़ाई से वंचित आखिर कब मिलेंगी किताबें ,छत्तीसगढ़ में स्कूलों को खोले एक महीना बीत चुका है, लेकिन अब भी कई सरकारी स्कूलों में छात्रों को किताबें नहीं मिली हैं। खासकर कक्षा आठवीं के छात्र पूरी तरह किताबों से वंचित हैं, जिससे पढ़ाई पूरी तरह से प्रभावित हो रही है।

हमने ज़मीनी हकीकत जानने के लिए एक स्कूल का दौरा किया, जहां शिक्षकों और छात्रों से बात कर गंभीर खामियां उजागर हुईं। स्कूल के शिक्षक सुरेश कुमार यादव ने बताया, “आठवीं कक्षा की एक भी पुस्तक अब तक नहीं आई है। केवल अंग्रेज़ी और सामाजिक विज्ञान की कुछ किताबें प्राप्त हुई हैं। बाकियों का अभी तक ‘स्प्लिंग’ यानी बुक कोडिंग प्रक्रिया भी पूरी नहीं हुई है, जिसके बिना वितरण असंभव है।”

छठवीं कक्षा में भी स्थिति कुछ अलग नहीं है। वहां पर गणित की एक पुस्तक के केवल दो प्रतियां ही उपलब्ध हो सकी हैं, जिन्हें दो छात्रों को ही दिया गया है, बाकी 15 प्रतियां आज तक वितरण की प्रक्रिया से भी नहीं गुजरी हैं।

ऑनलाइन प्रक्रिया बनी समस्या का कारण

इस वर्ष पुस्तक वितरण के लिए ऑनलाइन सिस्टम लागू किया गया है, जो अब शिक्षक और छात्रों दोनों के लिए सिरदर्द बनता जा रहा है। एक शिक्षक ने बताया, “पहले सालों से अप्रैल में किताबें मिल जाती थीं, और हम 16 जून तक बच्चों को पढ़ाने की स्थिति में होते थे। लेकिन इस बार ऑनलाइन प्रणाली के चलते वितरण प्रक्रिया में भारी देरी हो रही है।”

 

पुरानी किताबों से चल रही पढ़ाई

स्कूल स्टाफ और शिक्षक बच्चों की पढ़ाई को ठप न होने देने के लिए पुराने किताबों का जुगाड़ कर किसी तरह पढ़ा रहे हैं। लेकिन यह हर स्कूल या हर शिक्षक के लिए संभव नहीं है। शिक्षक कहते हैं, “हम पुराने उत्तर और किताबें लाकर पढ़ा रहे हैं, लेकिन इससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। ना नई किताबें हैं, ना पाठ्यक्रम में किए गए किसी बदलाव की जानकारी।”

छात्रों के भविष्य पर संकट

बच्चों की पढ़ाई लगातार बाधित हो रही है, जिसका असर उनके आगामी परीक्षाओं और सीखने की क्षमता पर भी पड़ेगा। बच्चों ने बताया कि “बिना किताबों के पढ़ाई करना बहुत मुश्किल है। शिक्षक जितना समझा पाते हैं, वही हम समझने की कोशिश करते हैं, लेकिन किताब न होने से खुद से अभ्यास करना मुश्किल है।”

सरकारी तंत्र पर उठ रहे सवाल

शिक्षकों का कहना है कि प्रदेश से अब तक किताबें ही नहीं भेजी गई हैं, जिससे प्रशासनिक असफलता साफ झलकती है। सवाल ये उठता है कि शिक्षा विभाग और राज्य सरकार ने समय पर बुक वितरण सुनिश्चित क्यों नहीं किया? क्या डिजिटल व्यवस्था को लागू करने से पहले ज़मीनी हालात का मूल्यांकन किया गया था?

निष्कर्ष

शिक्षा व्यवस्था में हो रही ऐसी चूक न केवल बच्चों का वर्तमान प्रभावित कर रही है, बल्कि उनके भविष्य पर भी सवाल खड़े करती है। अगर जल्द ही स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो इसका दुष्प्रभाव प्रदेश की पूरी शिक्षा प्रणाली पर पड़ेगा।

 

 

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