छत्तीसगढ़ में 66 माओवादियों ने किया सरेंडर

66 माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण: ₹2.54 करोड़ के इनामी, शीर्ष कमांडर रमन्ना उर्फ जगदीश भी शामिल।

छत्तीसगढ में माओवादियों के खिलाफ चलाए जा रहे सरकार के आक्रामक अभियान का बड़ा असर अब ज़मीन पर दिखने लगा है। बीते 18 महीनों में 1,570 माओवादी आत्मसमर्पण कर चुके हैं, लेकिन 24 जुलाई 2025 को बस्तर संभाग में जो हुआ, वह अब तक की सबसे बड़ी कामयाबी में से एक मानी जा रही है।

छत्तीसगढ़

बस्तर के पांच ज़िलों—बीजापुर, दंतेवाड़ा, कांकेर, नारायणपुर और सुकमा—में कुल 66 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है। इन पर कुल मिलाकर ₹2.54 करोड़ का इनाम घोषित था। इनमें सबसे बड़ा नाम है एचजेडसीएम स्तर के टॉप कमांडर रमन्ना इरफा उर्फ जगदीश का, जिन पर ₹25 लाख का इनाम घोषित था। उन्होंने बीजापुर पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया।

माओवादियों के आत्मसमर्पण का जिलावार विवरण:

जिला आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी

 

बीजापुर 25

दंतेवाड़ा 15

कांकेर 13

नारायणपुर 8

सुकमा 5

कुल 66

 

किन-किन स्तर के माओवादियों ने किया सरेंडर?

 

1 HZCM (हाई जोनल कमांड मेंबर)

4 DVCM (डिवीजनल कमांड मेंबर)

4 TLG-1 काडर

15 एरिया कमेटी पार्टी मेंबर

7 रेलवे सदस्य

29 सहायक व अन्य श्रेणी के माओवादी

 

 

प्रत्येक माओवादी को सरकार की पुनर्वास नीति के तहत ₹50,000 की तत्काल सहायता राशि भी प्रदान की गई है।

 

सरेंडर के पीछे क्या कारण हैं?

पुलिस प्रेस नोट के मुताबिक, आत्मसमर्पण के पीछे कई कारण हैं:

संगठन में आंतरिक मतभेद

मोहभंग और भविष्य की अनिश्चितता

एक शांतिपूर्ण पारिवारिक जीवन की आकांक्षा

सुरक्षा बलों का बढ़ता दबाव और लगातार चल रहे सर्जिकल ऑपरेशन

 

बड़ा सवाल: हथियार कहां हैं?

हालांकि, यह भी एक चिंताजनक बात है कि इतने बड़े स्तर के माओवादी सरेंडर कर रहे हैं, लेकिन उनके हथियार नहीं बरामद हो रहे हैं। क्या ये हथियार संगठन के पास छोड़कर आए हैं? क्या आगे चलकर निशानदेही से हथियार बरामद होंगे? या ये हथियार भविष्य में फिर किसी हिंसक मंसूबे के लिए काम आएंगे?

 

यह सवाल अभी भी अनुत्तरित है, जो सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।

सरकार के लिए जीत, माओवादियों के लिए मनोवैज्ञानिक हार

 

बिना खून-खराबे के इतना बड़ा आत्मसमर्पण सुरक्षा बलों की रणनीति की सफलता है। साथ ही, माओवादियों के भीतर संगठनात्मक विघटन और डर का प्रमाण भी। आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी अपने साथ संगठन की अंदरूनी रणनीति और पॉलिसी भी उजागर करते हैं, जो सरकार और सुरक्षा बलों के लिए भविष्य की रणनीति बनाने में मदद करता है।

माओवादियों

निष्कर्ष: क्या माओवादी खत्म हो रहे हैं?

सरकार का लक्ष्य 31 मार्च 2026 तक माओवाद को पूरी तरह समाप्त करना है। लेकिन यह तभी संभव होगा जब सरेंडर के साथ हथियार भी बरामद हों, और संगठन की रीढ़—सेंट्रल कमेटी और पोलित ब्यूरो सदस्य—भी आत्मसमर्पण करें या कार्रवाई में पकड़े जाएं।

फिलहाल के लिए, यह माओवादी नेटवर्क पर एक मनोवैज्ञानिक प्रहार है और सरकार की नीति की बड़ी जीत।

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