छत्तीसगढ़ की बेटी किरण पिस्दा ने रचा इतिहास, भारतीय महिला फुटबॉल टीम के साथ एशियन चैंपियनशिप में पहुंचीं
जय छत्तीसगढ़! जय भारत! छत्तीसगढ़ की धरती से एक बार फिर देश का नाम रोशन हुआ है। बालोद जिले की बेटी किरण पिस्दा ने अपने शानदार प्रदर्शन से भारतीय महिला फुटबॉल टीम को 22 साल बाद एशियन चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। किरण की इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने पूरे प्रदेश को गर्व से भर दिया है।
थाईलैंड को हराकर बना इतिहास
हाल ही में थाईलैंड में आयोजित क्वालिफाइंग मैच में भारतीय महिला टीम ने थाईलैंड को 2-1 से हराकर इतिहास रच दिया। यह जीत सिर्फ एक मैच नहीं, बल्कि भारतीय महिला फुटबॉल के इतिहास में मील का पत्थर साबित हुई। भारत ने करीब दो दशकों के लंबे इंतजार के बाद इस मुकाम को हासिल किया है।
इस जीत में किरण पिस्दा, जो डिफेंडर की भूमिका निभा रही थीं, उनका प्रदर्शन अत्यंत सराहनीय रहा। उनका डिफेंस मजबूत था और उन्होंने विपक्षी टीम के कई प्रयासों को असफल किया। उनका आत्मविश्वास और समर्पण मैदान पर साफ नजर आ रहा था।
बालोद से आयरलैंड और यूरोप तक का सफर
किरण पिस्दा का सफर किसी प्रेरणा से कम नहीं है। बालोद के एक सामान्य परिवार से आने वाली किरण ने बिना किसी सरकारी सहायता के अपने बलबूते यह मुकाम हासिल किया है। उनके पिता महेश पिस्दा, बालोद जिला कार्यालय में सहायक अधीक्षक के पद पर कार्यरत हैं, और उनकी माता मीरा पिस्दा, एक साधारण गृहिणी हैं। परिवार ने हमेशा किरण के सपनों को सहारा दिया, और आज वही सपने साकार हो गए हैं।
किरण ने पहले संस्कारशाला बालोद स्कूल में पढ़ाई की और बाद में महावीर विद्यालय, बालोद में 11वीं–12वीं की पढ़ाई की। इसके बाद वे रायपुर चली गईं, जहां उन्होंने अपनी फुटबॉल ट्रेनिंग को और निखारा।
यूरोपीय क्लब से लेकर राष्ट्रीय टीम तक
किरण का टैलेंट सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी पहचाना गया। 2023 में उन्होंने क्रोएशिया के एक फुटबॉल क्लब से जुड़कर यूरोप में भी खेला। इससे पहले वे एफसी चेन्नई और केरल ब्लास्टर्स जैसी प्रतिष्ठित टीमों का भी हिस्सा रही हैं। यूरोप में 8 महीने तक ट्रेनिंग और मैच खेलने का अनुभव किरण के खेल में साफ झलकता है। आयरलैंड में हुए मैचों में उन्होंने जो प्रदर्शन किया, वह उनकी मेहनत और अनुभव का ही परिणाम है।
छत्तीसगढ़ की जनता का अभूतपूर्व स्वागत
थाईलैंड में जीत के बाद जब किरण छत्तीसगढ़ लौटीं, तो उनके स्वागत में लोग उमड़ पड़े। खासकर दामिनी बंजारे द्वारा लिया गया इंटरव्यू लोगों के बीच काफी चर्चा में है, जिसमें किरण ने अपने संघर्ष और सपनों की बातें साझा कीं। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ उनका नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ और भारत का सपना था, जो अब पूरा हुआ है।
किरण का कहना है कि उन्हें गर्व है कि वे भारतीय टीम का हिस्सा बनीं और देश के लिए खेल सकीं। उन्होंने यह भी कहा कि अब उनकी नजरें एशियन चैंपियनशिप पर हैं, और वे अपनी मेहनत और देश के समर्थन से वहां भी बेहतर प्रदर्शन करेंगी।
पूरे छत्तीसगढ़ में खुशी की लहर
किरण की इस उपलब्धि से न केवल उनका परिवार, बल्कि पूरा छत्तीसगढ़ गर्वित है। उनके पिता ने कहा, “यह सिर्फ हमारे परिवार की नहीं, पूरे राज्य की जीत है। हमारी बेटी ने यह साबित कर दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी सपना साकार हो सकता है।”
छत्तीसगढ़ सरकार और खेल विभाग को अब ऐसे होनहार खिलाड़ियों को और सहयोग देने की आवश्यकता है ताकि आने वाले समय में और भी किरण पिस्दा देश का नाम रोशन कर सकें।
निष्कर्ष
किरण पिस्दा की कहानी एक सच्ची प्रेरणा है। यह साबित करता है कि प्रतिभा किसी संसाधन की मोहताज नहीं होती। बालोद की बेटी ने जो मुकाम हासिल किया है, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए मिसाल है। हम सभी को किरण को गाढ़ा-गाढ़ा बधाई देना चाहिए, जिन्होंने न सिर्फ फुटबॉल खेला, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया।
जय छत्तीसगढ़! जय भारत! किरण पिस्दा – हमारी गोल्डन गर्ल!